डा. मनोरमा ढौंडियाल व डा. ललन बुड़ाकोटी को मिला साहित्यांचल रत्न सम्मान

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : बेहतर सामाजिक कार्यों के लिए साहित्यांचल संस्था की ओर से डा. मनोरमा ढौंडियाल व डा. ललन बुड़ाकोटी को साहित्यांचल रत्न सम्मान दिया गया है।
नजीबाबाद रोड स्थिति एक बारात घर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जनार्दन बुडाकोटी, प्रो. नंद किशोर ढौंडियाल, वेदप्रकाश माहेश्वरी, चक्रधर शर्मा, योगेश पांथरी, अशोक निर्दोष व डा. ललन बुडाकोटी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वजलित कर किया। संस्था के अध्यक्ष जनार्दन बुड़कोटी ने पचास वर्षों की साहित्य साधना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अब तक संस्था पांच सौ पुस्तकों का प्रकाशन कर चुकी है। प्रो. नंद किशोर ढौंडियाल ने कहा कि पचास वर्षों तक निरंतर साहित्य का प्रकाश करना संस्था के लिए गौरव की बात है। कहा कि साहित्य रचना करना नए युग का सृजन करना होता है। कार्यक्रम में रंगकर्मी अनुसुया प्रसाद की चित्र प्रदर्शनी व रणबीर चौहान, मंजुल ढौंडियाल व बीना मित्तल की पेंटिग्स का भी अवलोकन किया गया। साहित्याचंल के संस्थापक वेद प्रकाश माहेश्वरी को उनके 82वें वर्ष में प्रवेश करने व उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उनका शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। इस मौके पर चंद्रप्रकाश नैथानी, डा. पीसी जोशी, प्रवेश नवानी, सुरेंद्र लाल आर्य, शशि भूषण अमोली, मोहिनी नौटियाल, डा. पंकज भारद्वाज, मनोज, प्रेम बलोदी, डा. अशोक गिरि, डा. चंद्रमोहन बड़थ्वाल, जनार्दन ध्यानी, महेश चंद्रा, एसएन नौटियाल, डा. अनुराग, राकेश अग्रवाल, हीरा सिंह बिष्ट, जगत राम जोशी, राधे श्याम कोटनाला, माधवी रावत मौजूद रहे।

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