जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : गर्मी बढ़ने के साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल संकट भी बढ़ने लगा है। हालांकि, पेयजल संकट के पीछे सरकारी तंत्र की लापरवाही भी सामने आ रही है। बात नौगांवखाल बाजार की करें तो बाजार में पिछले दो सप्ताह से ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। दरअसल, जिस पेयजल योजना से बाजार में पेयजल आपूर्ति होती है, योजना में लगे पाइपों में लंबे समय से लीकेज हैं। लेकिन, विभाग की ओर से इन पाइपों को नहीं बदला जा रहा है।
अस्सी के दशक में नौगांवखाल बाजार के साथ ही आसपास के गांवों को पेयजल सुविधा मुहैया करवाने के लिए नौगांव-धर्मपुर-पांथर पेयजल योजना का निर्माण किया गया था। समय के साथ योजना जर्जर होती चली गई और आज हालात यह हैं कि गर्मी की दस्तक के साथ ही नौगांवखाल बाजार में पेयजल की समस्या शुरू हो जाती है। नौगांवखाल बाजार के आसपास कोई प्राकृतिक स्रोत भी नही हैं, जिसके कारण बाजारवासियो को पेयजल के लिए कई किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोतों की शरण लेनी पड़ती है। ऐसा नहीं कि योजना के स्रोत पर पानी की कमी हो। लेकिन, योजना में लगे पाइपों में जगह-जगह लीकेज होने के कारण बाजार में पेयजल किल्लत हो रही है। क्षेत्रीय जन की माने तो जल संस्थान प्रतिवर्ष इस योजना पर लाखों की धनराशि फूंकता है। लेकिन, समस्या यथावत ही रहती है। बताना जरूरी है कि योजना से क्षेत्र के नौगांवखाल, पांथर, मरड़ा, रणस्वा, जणदा देवी आदि गांव में भी पेयजल सप्लाई होती है। नौगांवखाल निवासी सुबोध बमोला, देवेश बडोला, हर्षबल्लभ, हीरा देवी, नवीन कुमार, यतेंद्र कुमार आदि का कहना है कि बाजार में कई कनेक्शन अवैध लगाये गये हैं। विभाग को लिखित शिकायत करने के बाद भी विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। कहा कि इस संबंध में लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज को भी पत्र दिया गया था। साथ ही जल संस्थान के अधिकारियों को भी लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया गया था। लेकिन, न ही लीकेज पाइपों को बदला गया और न ही क्षतिग्रस्त पाइप लाइन की मरम्मत की गई। चेतावनी देते हुए कहा गया कि समस्या का समाधान शीघ्र न होने पर क्षेत्रीय जन को जल संस्थान कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इधर, जल संस्थान के अवर अभियंता संजय सिंह ने बताया कि योजना के स्रोत पर लीजके हो रही पाइपों को शीघ्र बदल दिया जाएगा। साथ ही अवैध कनेक्शनों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।