पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा अपराध की दुनिया में कूद रहे

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हल्द्वानी। पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी के लिए कोशिश करने के बजाए युवा अपराध की दुनिया में कूद रहे हैं। ऐसे एक नहीं अनेकों मामले हैं। पिछले एक साल के भीतर तीन सौ से अधिक लोगों को पुलिस ने नशा तस्करी में पकड़ा, जिनमें से ढाई सौ से अधिक आरोपी 12वीं या इससे अधिक पढ़े-लिखे रहे। रुपयों के लालच में स्मैक, चरस, गांजा व अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी में उतरे और सलाखों के पीछे पहुंच गए। पुलिस विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक कुमाऊं के छह जिलों में एक साल के भीतर पुलिस ने 16.44 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों की बरामदगी की। इनमें चरस, स्मैक, गांजा, अफीम, नशे के इंजेक्शन और गोलियां शामिल हैं। पुलिस ने 319 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, इनमें से 271 ऐसे थे जिन्होंने 12वीं या स्नातक की पढ़ाई की है। आरोपियों की आयु 20 से 32 वर्ष के बीच है, जो इस बात का संकेत है कि पढ़े-लिखे युवा नशे के कारोबार की गिरफ्त में आ रहे हैं। पहाड़ों को भी खोखला कर रहा नशा मैदान ही नहीं पहाड़ों को भी नशे का कारोबार बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। पिथौरागढ, चम्पावत, अल्मोड़ा और बागेश्वर में बीते एक साल के भीतर पुलिस ने 3.81 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों की बरामदगी की है। 50 किलो चरस, डेढ़ किलो से अधिक स्मैक, 30 किलो गांजा व अन्य मादक पदार्थ की पुलिस ने बरामदगी की। ऑनलाइन नहीं करते नशे की डील पुलिस के मुताबिक आरोपी नशे की सप्लाई की डील ऑनलाइन नहीं करते। यानि किसी स्थान पर मिलकर योजना बना लेते हैं। जिसके बाद कमीशन और इसे पहुंचाने की जिम्मेदारी तय होती है। ये बात पुलिस को आरोपियों ने पूछताछ में बताई है।
कोट:
साल भर में 16 करोड़ से अधिक का नशा पकड़ा है। पुलिस नशे पर कड़ा प्रहार कर रही है। युवाओं को इससे बचने की जरूरत है। – रिद्धिम अग्रवाल, आईजी कुमाऊं

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