जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाथियों की धमक बढ़ती जा रही है। सोमवार सुबह हाथी का झुंड अचानक हाईवे पर पहुंच गया था, जिस कारण मार्ग पर वाहनों का लंबा जाम लगा हुआ था। हाईवे पर संकेतक न होने के कारण पर्यटकों को हाथी प्रभावित क्षेत्र का अंदाजा नहीं लग पा रहा है, जिससे हर समय मानव-वन्य जीवन संघर्ष का खतरा बना रहता है।
कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र से सटा हुआ है। यही कारण है कि हाईवे पर आए दिन हाथियों की धमक बनी रहती है। सोमवार सुबह करीब लालपुल के समीप अचानक हाथियों का झुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया। हाथी को देख वाहन चालकों ने दूरी बना ली थी। कई लोग वाहनों से उतर कर हाथियों की फोटो खींचते हुए भी नजर आए। हाईवे पर चहलकदमी करने के बाद झुंड वापस जंगल की ओर चला गया था। इसके बाद हाईवे पर यातायात सुचारु हुआ।
खोह में पानी की तलाश में पहुंचते हैं हाथी
कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य कई स्थानों पर हाथी जंगल से निकलकर हाईवे पर पहुंचता है। कई बार हाथियों का झुंड उक्त स्थान से हाईवे को पार कर खोह नदी में भी जाती है। बावजूद वन विभाग की ओर से इन इलाकों में पर्याप्त संकेतक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में पर्यटकों को हाईवे पर हाथी के क्षेत्र का पता नहीं चल पाता। जबकि, पूर्व में कई बार हाथी राहगीरों को दौड़ा भी चुका है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय आवागमन करने वालों को होती है। ऐसे में हाईवे पर वाहन चालकों को सावधानी पूर्वक सफर करना चाहिए। मोड़ पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जब हाथी राष्ट्रीय राजमार्ग पर हो तो कुछ देर शांति से उसके वापस जंगल में जाने का इंतजार करें। हाथी पर पत्थर न फेंके, ऐसे में वह चिढ़कर पीछे दौड़ने लगता है, जिससे जान का भी खतरा हो सकता है।