उत्तरकाशी()। आपदा के सात माह बाद भी यमुनोत्री हाईवे पर स्थित स्यानाचट्टी क्षेत्र में सुरक्षात्मक कार्य धरातल पर नहीं उतर पाए। हालांकि एहतियातन यहां स्यानाचट्टी के लिए खतरा बने गढुगाड़ खड्ड में सिंचाई विभाग की ओर से पोकलेन मशीनें चैनेलाइजेशन के कार्य में लगी है। अब तक सुरक्षात्मक कार्य न होने से स्थानीय लोग भविष्य में फिर आपदा की आशंका से भयभीत हैं। गत वर्ष 28 जून को आई आपदा से स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर मलबा एकत्रित होने से जलभराव से काफी नुकसान हुआ था। इससे स्यानाचट्टी में आबादी क्षेत्र काफी प्रभावित हो गई थी। होटलों और घरों में मलबा व पानी घुस गया था। गढुगाड़ खड्ड के मलबे के कारण कुपड़ा, कुंसाला तिर्खली गांव को जोड़ने वाली सड़क भी कई मीटर हिस्से तक धंस गई थी। आज भी इस क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हो पाए। अब जबकि सही समय पर यहां सुरक्षात्मक कार्य होने चाहिए थे लेकिन अभी तक कोई काम धरातल पर शुरू होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। इसके चलते स्थानीय लोग भविष्य में फिर से आपदा की आशंका से चिंतित है। स्थानीय लोगों ने शासन प्रशासन की लापरवाही पर गहरी नाराजगी प्रकट की है। कुपड़ा गांव की प्रधान प्रभा राणा, मनमोहन सिंह आदि ने शासन प्रशासन से बरसात से पूर्व सुरक्षात्मक उपाय के साथ ही तीनों गांवों की आवाजाही सामान्य करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्यानाचट्टी के लिए खतरा बना गढुगाड़ खड्ड में सिंचाई विभाग की पोकलेन मशीनों को लगा कर चैनेलाइजेशन कार्य शुरू किया गया है लेकिन इससे क्षेत्र की सुरक्षा नहीं होने वाली। सिंचाई विभाग के ईई पन्नी लाल का कहना है कि सुरक्षात्मक कार्यों के लिए प्रस्ताव शासन को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही काम प्रारंभ कर दिया जााएगा।