बारिश और बर्फबारी से किसान- बागवानों के चेहरे खिले

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विकासनगर()। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बर्फबारी और बारिश हो ही गई। बारिश और बर्फबारी से किसान- बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। खासकर सेब की फसल के लिए यह बर्फबारी संजीवनी साबित होगी। इसके अलावा अन्य फसालों आडू, खुमानी, पुलम,चुल्लू, नाशपाती को भी यह बारिश और बर्फबारी काफी फायदा पहुंचाएगी। दरअसल, सेब के लिए बर्फबारी काफी मुफीद होती है। क्योंकि यह पेड़ों को आवश्यक चिलिंग आवर्स देती है। जो सुप्तावस्था एक समान फूल आने और अच्छी फसल के लिए जरूरी है। बर्फबारी की कमी से पैदावार घटती है और रोग की आशंका बनी रहती है। बफबारी से मिट्टी में नमी बनी रहती है। साथ ही यह हानिकारण कीटों और रोगों को खत्म करती है। जिससे फलों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ता है। आमतौर में चकराता, जौनसार क्षेत्र में दिसंबर अंत तक बर्फबारी हो जाती थी, लेकिन इस बार अभी तक सूखे जैसे हालत थे। जिससे बागवानों के चेहरे से रौनक उड़ी थी। उन्हें उत्पादन कम होने की चिंता रही थी। लेकिन बर्फबारी होने से अब किसानों, बागवानों के चेहरे पर रौनक लौट गई है। सेब एक्सपर्ट नरेश चौहान ने बताया कि इस वर्ष जनवरी आखिर में बारिश और बर्फबारी हुई। फिर भी सेब के लिए फायदेमंद साबित होगी। बागवान संजय जोशी ने बताया देर से बारिश बर्फबारी का बागवानी कार्य, बगीचों के तौलिए बनाने, निडाई, गुडाई, खाद, गोबर डालना, कटिंग पुरोनिग आदि कार्य प्रभावित हुए हैं। बागवान लायक राम शर्मा बताते है कि अब उम्मीद जगी है। बर्फ बारिश से सेब का अच्छा उत्पादन होगा। सीएचओ डॉ. दिनेश कुमार तिवारी ने बताया बर्फबारी बारिश सेब के सहित सभी फलदार फसलों के लिए लाभदायक है।
नकदी फसलों के लिए बरदान साबित होगी बारिश: साहिया। देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में खेती बाड़ी करने वाले किसानों के लिए ये बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। पिछले चार महीनों से आसमान से एक बूंद भी नहीं गिरी। जिससे क्षेत्र के किसानों के चेहरे मायूस थे। क्षेत्र में किसानों द्वारा नगदी फसलों का उत्पादन किया जाता है। जो पूरी तरह आसमानी बारिश पर निर्भर है। क्षेत्रीय किसानों ने इस समय मटर, लहसुन, गेहूं, जौ, मसूर आदि फसलों की बड़े पैमाने पर खेती की है, लेकिन बारिश नहीं होने से फसल सूखने की कगार पर थी। वहीं कुछ किसानों ने बारिश की आस में अभी तक मटर की बुवाई नहीं की थी। साहिया क्षेत्र के सुरेऊ, भंजरा, ऊभरेऊ, जिसऊ, देऊ, डांडा, अलसी, सकनी, कोठा तारली, चंदोऊ, सैंज आदि गांवों के किसानों ने बड़ी मात्रा में मटर, लहसुन, गेहूं आदि फसलों की बुवाई की है। क्षेत्र के किसान स्वरूप सिंह, प्रताप सिंह तोमर, कृपाल सिंह बिष्ट, दयाराम नेगी आदि किसानों ने बताया कि वे काफी समय से बारिश का इंतजार कर रहे थे, बारिश होने से कुछ उम्मीद जगी है अगर समय रहते बारिश होती तो किसानों को फसलों को इसका और अधिक लाभ मिलता। कहा कि मटर और लहसुन के बीज महंगे दामों पर खरीदे गए हैं। ऐंसे में इस बारिश से बीज, खाद व अन्य लागत वसूल होने की आशा है।

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