रवांई का प्रसिद्ध लाल धान अज्ञात बीमारी की चपेट में, किसान चिंतित

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उत्तरकाशी। रवांई घाटी के रामा सिराईं एवं कमल सिरांई समेत मोरी के गडूगाड़ क्षेत्र की प्रसिद्ध लाल धान की फसल अज्ञात बीमारी की चपेट में है। धान की फसल खेतों में पीली पड़कर सूखने लगी है, जिसे देखकर काश्तकार बेहद चिंतित हैं। क्षेत्र के किसान सुदामा बिजल्वाण, राजपाल पंवार, नवीन गैरोला, धनवीर सिंह रावत, श्यालिक राम नौटियाल, रमेश असवाल आदि ने बताया कि क्षेत्र में एक माह पहले दिन रात मेहनत से धान रोपाई की। अब अज्ञात रोग से किसानों की मेहनत बर्बादी की कगार पर है। स्थानीय बोली में तितरा रोग से ग्रसित धान की फसल मुरझाकर पीली पड़ चुकी है। जिससे आने वाले समय में किसानों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट गहरा सकता है। गुंदियाट गांव, पुरोला, नेत्री, खलाड़ी, देवदूंग, छिबाला, महरगांव, स्वील, ठडूंग, चंदेली, भद्राली, सुकड़ाला, सुनाली आदि गांव के काश्तकारों ने भी धान की फसल अज्ञात बीमारी की चपेट में आने की शिकायत की है। उल्लेखनीय है कि रंवाई घाटी के कमल सिरांई,रामा सिराईं पट्टियों सहित गडूगाड़ पट्टी के दर्जनों गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक किसान लाल धान की जैविक खेती करते हैं। यह लाल चावल उत्तरकाशी की यमुना घाटी का प्रमुख कृषि उत्पाद है, जिसकी मांग हिमाचल सहित देश के कई राज्यों में है। किसान हर वर्ष 120 से 150 रुपये प्रति किलो की दर से सैकड़ों क्विंटल लाल चावल,धान बेचते हैं, जिससे सालभर की आजीविका चलती है। किसानों ने कृषि विभाग से अज्ञात रोग का उपचार कर नुकसान का जायजा लेने व फसल क्षति का मूल्यांकन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों को छिड़काव की सलाह दी सहायक कृषि अधिकारी विकास तोमर ने बताया कि लाल धान की फसल पर बीमारी की सूचना मिल रही है। विभागीय टीम ने मौके पर जायजा लिया है तथा काश्तकारों को शुरूआती दौर में फास्फोरस, नाइट्रोजन,पोटास आदि उर्वरकों के छिड़काव की सलाह दी है, जिससे बीमारी को व्यापक रूप से फैलने से रोका जा सकता है।

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