मेरठ , मेरठ में बारिश और भूकंप के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया। किला परीक्षितगढ़ रोड पर एक बड़ा पेड़ अचानक बाइक पर गिर गया, जिससे बाइक पर सवार ढाई साल की बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका पिता गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना गुरुवार दोपहर की है, जब क्षेत्र में तेज बारिश हो रही थी और उसी समय भूकंप के झटके भी महसूस किए गए। चश्मदीदों के अनुसार, भूकंप के कंपन के दौरान पेड़ सड़क की ओर झुका और गिर गया, ठीक उसी समय बाइक वहां से गुजर रही थी। घायल पिता को मेरठ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। परिवार पर इस हादसे से गहरा सदमा टूटा है। मासूम बच्ची की मौत ने हर किसी को भावुक कर दिया है।
इस बार मानसून की रफ्तार ने गर्मी और उमस से जूझ रहे मेरठ वासियों को राहत दी है। जुलाई माह के शुरुआती 10 दिनों में बारिश ने पिछले वर्षों के आंकड़े पीछे छोड़ दिए हैं।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला प्रभारी अशोक गुप्ता के अनुसार, गुरुवार सुबह 8:30 बजे तक 40 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे माह की कुल बारिश 90.7 मिमी हो चुकी है।
यह बीते 10 वर्ष में दूसरी सबसे ज्यादा दर्ज की गई जुलाई की शुरुआती बारिश है। वर्ष 2023 में इसी अवधि में 151 मिमी बारिश हुई थी, जबकि 2024 में सिर्फ 56.3 मिमी। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई 2025 की बारिश पिछले कई वर्ष का रिकॉर्ड भी तोड़ सकती है और सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना बनी हुई है। गुरुवार को सुबह से ही रिमझिम फुहारों ने मौसम को खुशनुमा बना दिया। तेज गर्मी और उमस से जूझ रहे शहरवासियों को इससे खासी राहत मिली है।
मेरठ समेत एनसीआर में भूकंप के तेज झटके, फ्लैट छोड़कर बाहर भागे लोग, फैली दहशत
गुरुवार सुबह 9:05 बजे मेरठ, दिल्ली और पूरे एनसीआर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई, जिसका केंद्र हरियाणा के झज्जर में था। झटके करीब 15 से 20 सेकंड तक महसूस किए गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
मेरठ के मोदीपुरम में उस वक्त अजीब नजारा देखने को मिला जब भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री सत्येंद्र भराला भूकंप के झटकों के बीच बाथरूम से बाहर निकलकर जोर-जोर से चिल्लाने लगे। उन्होंने बताया कि जैसे ही धरती हिलती महसूस हुई, वे घबरा गए और शोर मचा दिया। कोणार्क कॉलोनी, सनसिटी, अंसल कोट्यार्ड, मेरठ वन कॉलोनी समेत मल्टी स्टोरी इलाकों के लोग अपने फ्लैट्स से निकलकर मैदानों में पहुंच गए। रजनीश कुमार, ओमपाल गुर्जर, और आकाश प्रधान जैसे स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कई वर्षों में इतने तेज झटके उन्होंने कभी नहीं महसूस किए।
हर कॉलोनी, हर गली, हर मोहल्ले में एक ही दृश्य देखने को मिला। लोग सड़कों पर खड़े होकर कह रहे थे कि अगर कुछ सेकंड और रहता, तो मकान गिर सकते थे। भूकंप की तीव्रता और झटकों की अवधि ने लोगों को डरा दिया। गांव से लेकर शहर तक, हर किसी ने इसे महसूस किया। विशेषज्ञों ने चेताया कि लगातार ऐसे झटके आना खतरे की घंटी हो सकते हैं।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि एक बड़े झटके के बाद कई हल्के झटके आ सकते हैं। मेरठ सिस्मिक जोन 4 और 5 में आता है, जहां भूकंप की संभावनाएं अधिक रहती हैं। प्लेट टैक्टोनिक सिद्धांत के अनुसार, पृथ्वी की प्लेट्स लगातार हिलती रहती हैं, जिससे ऐसी घटनाएं होती हैं। लोगों ने राहत की सांस ली कि इसका केंद्र गहराई में था और इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन डर अब भी कायम है।