नई दिल्ली,। संसद में आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था का सालाना लेखा-जोखा यानी आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश कर दिया है। 1 फरवरी को आने वाले आम बजट से पहले पेश किए गए इस दस्तावेज में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत और स्थिर तस्वीर दिखाई दी है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में विकास दर और महंगाई के मोर्चे पर देशवासियों के लिए राहत भरी खबर है।
विकास की रफ्तार रहेगी तेज, महंगाई हुई धड़ाम
सर्वेक्षण के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती बनाए रखी है। वित्त वर्ष 2026-27 में देश की जीडीपी (त्रष्ठक्क) विकास दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। हालांकि यह मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.4 प्रतिशत की दर से मामूली रूप से कम है, लेकिन फिर भी यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे बेहतर है। आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत महंगाई के मोर्चे पर है। खुदरा महंगाई (ष्टक्कढ्ढ) में भारी गिरावट दर्ज की गई है और वर्ष 2025-26 में यह घटकर 1.7 प्रतिशत पर आ गई है, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत है।
निर्यात में ऐतिहासिक उछाल, सेवा क्षेत्र बना सहारा
व्यापार के मोर्चे पर भारत ने नया इतिहास रच दिया है। वित्त वर्ष 2025 में देश का कुल निर्यात रिकॉर्ड 825.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही निर्यात का आंकड़ा 418.5 अरब डॉलर को छू गया है। इस तेजी का मुख्य कारण सेवा क्षेत्र (स्द्गह्म्1द्बष्द्ग स्द्गष्ह्लशह्म्) का शानदार प्रदर्शन और गैर-पेट्रोलियम व गैर-रत्न आभूषणों के निर्यात में आई मजबूती है। दूसरी तरफ, आयात में भी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2025 में कुल आयात 7.4 प्रतिशत बढ़कर 919.9 अरब डॉलर हो गया, जिससे व्यापार घाटा 94.7 अरब डॉलर रहा है।
आत्मनिर्भरता और विदेशी निवेश पर भरोसा
बजट से पहले जारी इस दस्तावेज में सरकार ने आत्मनिर्भरता और रणनीतिक मजबूती पर विशेष जोर दिया है। सर्वे में कहा गया है कि भारत को बाहरी झटकों से निपटने के लिए घरेलू क्षमता बढ़ानी होगी ताकि देश रणनीतिक रूप से सुरक्षित रह सके। विदेशी निवेश (स्नष्ठढ्ढ) को लेकर भी स्थिति सकारात्मक है। नए प्रोजेक्ट्स और इक्विटी निवेश के चलते एफडीआई का प्रवाह स्थिर बना हुआ है, हालांकि वैश्विक हालात के कारण पोर्टफोलियो निवेश में थोड़ा उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है। कुल मिलाकर यह सर्वे 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट की दिशा तय करेगा।