नईदिल्ली , ईरान युद्ध के चलते ऊर्जा संकट और तनाव के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर हैं। अपनी 2 दिवसीय यात्रा के दौरान वे यूएई के शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्च स्तरीय बैठकें करेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की ऊर्जा सुरक्षा इस यात्रा का सबसे अहम एजेंडा रहेगा। ये दौरान अमेरिका-ईरान के बीच नाजुक युद्धविराम के बीच पश्चिम एशिया में अहम साझेदारों के साथ भारत के संबंधों को सुधारने के प्रयासों का हिस्सा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जयशंकर की यात्रा ऊर्जा आपूर्ति, पश्चिम एशिया की स्थिति को समझने के साथ-साथ पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद दक्षिण एशिया में अमीरात की स्थिति पर केंद्रित होगी। इसमें उन भारतीय नागरिकों की सहायता के प्रति यूएई का आभार भी व्यक्त किया जाएगा, जो युद्ध के चलते उड़ानें रद्द होने के कारण फंस गए थे। हालांकि, अभी तक एजेंडे को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
जयशंकर अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अपने यूएई समकक्ष अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय चर्चा कर सकते हैं। एक सूत्र ने बताया कि विदेश मंत्री यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की भी संभावना है, लेकिन कहा कि ऐसी मुलाकात का निर्णय अंतिम समय में ही लिया जाएगा। सूत्र ने कहा, जयशंकर की यात्रा के दौरान मुख्य चर्चा का विषय क्षेत्र की स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
जयशंकर का दौरा ऐसे वक्त हो रहा है, जब आज ही अमेरिका और ईरान के बीच में पाकिस्तान में युद्धविराम को लेकर वार्ता हो रही है। वहीं, ईरान युद्ध के चलते भारत की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। भारत के कच्चे तेल और एलएनजी का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की वजह से भारत को खर्चीले और लंबी दूरी वाले वैकल्पिक उपायों की ओर रुख करना पड़ा है।
ईरान युद्ध के बीच भारत लगातार अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है। एक ओर जहां विदेश मंत्री यूएई के दौरे पर हैं, वहीं, दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर के दौरे पर हैं। कतर भारत का बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है। मामले से परिचित लोगों के अनुसार, पुरी कतर से सप्लाई में तेजी लाने और एलएनजी के मामले में भारत को प्राथमिकता देने के लिए कह सकते हैं।