बंदरों के आतंक से निजात दिलाने में वन विभाग फेल

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार।
खूंखार बंदरों के आतंक से जनता को निजात दिलाने में वन विभाग पूरी तरह विफल है। विभागीय अधिकारी भी स्वीकार कर रहे हैं बंदर पिंजरों को देख भाग जाते हैं। ऐसे में समस्या खड़ी हो गई है। नगर निगम क्षेत्र में लोग बंदरों के आतंक से बहुत परेशान है। बंदरों के आतंक से परेशान लोगों ने वन विभाग से बंदरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।
नगर निगम के लगभग सभी वार्डों में यह समस्या बनी हुई है। सनेह क्षेत्र के रामपुर, कुंभीचौड़, विशनपुर, नाथूपुर, लालपानी, गोविंदनगर, जौनपुर, बालासौड़ सहित अन्य कई स्थानों में बंदरों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बंदर अभी तक सैकड़ों लोग को घायल कर चुके है। बंदरों का आतंक अब कोटद्वार में कोई नई बात नहीं है। आतंक अब हमलों में बदल गया है। स्थानीय भोली भाली जनता वन विभाग से उम्मीद लगाए बैठी है कि वह बंदरों के आतंक से निजात दिलाएगी, लेकिन विभाग के पिछले डेढ़ वर्ष को ट्रैक रेकॉर्ड को देखे तो लगता नहीं वन विभाग इन खूंखार हो चुके बंदरों को पकड़ पाएगा। हालांकि वन विभाग ने कई बार बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान भी चलाये, लेकिन बंदर पिंजरे को देखकर भागने लगे। लालपानी निवासी संदीप, जगदीप ने बताया कि बंदर सब्जी-फल सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है। भगाने पर वह काटने को आ रहे है। वन विभाग से कई बार बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की गई, लेकिन विभाग अभी तक समस्या का निराकरण नहीं कर पाया है। जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। आलम यह है कि लोग छत पर जाने में भी घबरा रहे है। उधर, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ दीपक सिंह का कहना है कि जहां बंदरों की सूचनाएं मिलती हैं वहां टीम र्को ंपजरे के साथ भेजा जाता है। बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जायेगा।

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