वन पंचायत सरपंचों ने उपेक्षा का लगाया आरोप

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श्रीनगर गढ़वाल : उत्तराखंड के वन पंचायत सरपंचों ने प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हमारी वन संपदाओं पर कोई और नहीं बल्कि शासन-प्रशासन व वन विभाग ही अतिक्रमण कर रहे हैं। मोर्चा के संयोजक गोपाल लोधियाल ने कहा कि उत्तराखंड में 64 फीसदी वन क्षेत्र था। लेकिन अब बढ़कर 72 फीसदी हो गया है जो हमारे अधिकारों पर कुठाराघात है।
बुधवार को वन पंचायत संघर्ष मोर्चा की प्रदेश स्तरीय बैठक श्रीनगर में संपन्न हुई। इस मौके पर मोर्चा के संयोजक व जिला अध्यक्ष बागेश्वर पूरण रावल ने कहा कि हमारी जैव विविधता के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। जल विद्युत परियोजनाओं के नाम पर पहाड़ को सुरंगों से पाटा जा रहा है। इन योजनाओं के दुष्प्रभाव पहाड़ झेल रहे हैं। लोधियाल ने कहा कि पौड़ी जिले में 190 वर्ग किमी क्षेत्रफल में लोगों की नाम जमीन को डीम्ड फॉरेस्ट में परिवर्तित कर दिया गया है। योजना का लाभ कोई और ही उठा रहे हैं। संयोजक कैलाश खंडूड़ी ने कहा कि वन सरपंच सरकार से अपने अधिकारों को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना चुके हैं। सरकार की उपेक्षा से आहत सरपंच जनभावनाओं की राजधानी गैरसैण से जल्द ही बड़ी हुंकार भरेंगे। ईश्वर जोशी ने कहा कि 4 अप्रैल को प्रदेश के समस्त जिलो व तहसील स्तर पर सीएम को मोर्चा पदाधिकारी ज्ञापन भेजेंगे। उसके बाद मोर्चा का एक प्रतिनिधिमंडल वन मंत्री व सीसीएफ से मिलेगा। इस अवसर पर अमर सिंह कनेरी, भाष्करानंद डिमरी, धनंत्री रतूड़ी, प्रकाश मेहरा, वंशीधर पांडेय, संजय जोशी सहित बड़ी संख्या में सरपंच मौजूद रहे। (एजेंसी)

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