जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : तीस वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों को न्याय नहीं मिलने पर उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मोर्चा ने रोष व्यक्त किया है। कहा कि आंदोलनकारियों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पदमपुर स्थित कार्यालय में बैठक का आयोजन किया गया। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रमन शाह ने कहा कि आंदोलनकारियों के लिए दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का विधेयक पारित होते ही भुवनेश जोशी ने आरक्षण के खिलाफ रिट दायर कर दी है। कोर्ट ने जवाब मांगा है कि सरकार कोर्ट के डबल बैंच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गई। कहा कि वे इस मामले में खुद ही सुप्रीम कोर्ट गए थे, जहां पर मामला लंबित है। उन्होंने इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हलफनामा कोर्ट में लगाया है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही आंदोलनकारियों के पक्ष में फैसला आ सकता है। कहा कि मुजफ्फरनगर कांड में भी छह केसों में एक केस पर फैसला हो गया है, जिसमें दो पुलिस कर्मियों को सजा हो गई है। पांच केसों की सुनवाई पूरी हो गई है। इसके अलावा छह केस नैनीताल हाईकोर्ट में लंबित है, जिन्हें अवैध तरीके से वर्ष 2005 में देहरादून जिला कोर्ट से मुजफ्फरनगर स्थानांतरित कर दिया गया था। महेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकारों की घोर उदासीनता के कारण विगत तीस सालों से राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को न्याय नहीं मिल पाया है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। इस मौके पर जगमोहन सिंह बिष्ट, जगदीश मेहरा, गुलाब सिंह रावत, हयात सिंह गुंसाई, दिनेश सती, राकेश चंद्र लखेड़ा, विनोद अग्रवाल, प्रवीण घनशाला, हरीश बहुखंडी आदि मौजूद रहे।