मायानगरी को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत प्रोत करने गायत्री परिवार ने किया भव्य दीपमहायज्ञ

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– महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिदें, युवा आइकान डॉ चिन्मय पण्ड्या सहित अनेक गणमान्य बने साक्षी
हरिद्वार। शांतिकुंज परिवार ने मायानगरी मुंबई में मार्च के महीने में एक बार पुनः हजारों जगमगाते दिये के साथ दिवाली मनाई। अवसर था मुंबई के खारघर में हुए अश्वमेध गायत्री महायज्ञ के पहला वार्षिकोत्सव। इस दौरान देश विदेश में सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक अखिल विश्व गायत्री परिवार के वरिष्ठ प्रतिनिधि युवा आइकान डॉ चिन्मय पण्ड्या के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखण्ड से विद्वानों की टीम पहुंची थी। जिन्होंने मुंबई के मुलुंड में आयोजित कार्यक्रम को आध्यात्मिकता के रंग से सराबोर कर दिया।
शांतिकुंज ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आयोजित सभा को संबोधित करते हुए देवसंस्कृति विश्व विद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकान डॉ पण्ड्या ने कहा कि जो संदेश देश दुनिया के लिए मायानगरी मुंबई से प्रसारित होता है, उससे अनेकानेक लोग प्रभावित होते हैं। आज दुनिया को सनातन संस्कृति के साथ जीवन मूल्यों को आत्मसात करने हेतु लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। युवा आइकान ने कहा कि वर्ष 2026 नारी जागरण के लिए समर्पित रही अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी वर्ष है। उनका जीवन एक प्रेरणा है, जिनकी साधना, तप और समर्पण ने हम सभी को सतत् सेवा और आत्मोत्थान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर हमें उनके जीवन-मूल्यों को आत्मसात कर, समाज के उत्थान और धर्म की स्थापना के संकल्प को और सशक्त बनाना चाहिए। अखण्ड दीपक, जो उनके नेतृत्व में प्रज्वलित हुआ, हमें निरंतर प्रकाश और साहस का प्रतीक बना रहेगा।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि गायत्री परिवार सनातन धर्म की रक्षा और विजय का मार्ग प्रशस्त कर रहा है, जो समाज में सत्य, धर्म और निष्ठा की स्थापना कर रहा है। पूर्व सांस्कृतिक, वित्त और वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, मिहिर कोटेचा जी ने भी विराट दीपमहायज्ञ के साक्षी बने। उन्होंने मुंबई में हुए अश्वमेध गायत्री महायज्ञ की संस्मरण को साझा किया।
इस भव्य आयोजन में मुंबई के कार्पोरेट, सिनेमा, मीडिया, राजनीति, शिक्षा, सामाजिक संगठन, गायत्री परिवार आदि क्षेत्रों से जुड़े हजारों साधकों सहित अनेकानेक गणमान्य नागरिकों ने आध्यात्मिक चेतना की इस दिव्य यात्रा से लाभान्वित हुए।

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