गीता धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, विश्व शांति के लिए मार्गदर्शक

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देहरादून ) । आयुर्वेद विवि के मुख्य परिसर हर्रावाला में गुरुवार को गीता जयंती सप्ताह का समापन हुआ। इसमें छात्रों को लक्ष्य-केंद्रित कर्म की प्रेरणा दी गई। वक्ताओं ने गीता के ज्ञान को न केवल धार्मिक ग्रंथ, बल्कि आधुनिक जीवन की समस्याओं, विशेष रूप से अवसाद (डिप्रेशन) के उपचार और विश्व शांति के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत बताया। शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री आचार्य सुभाष जोशी, विशिष्ट अतिथि अध्यक्ष श्रीमहाकाल सेवा समिति रोशन राणा, परिसर निदेशक प्रो. पंकज शर्मा, उपपरिसर निदेशक डॉ. नन्द किशोर दाधीच, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजीव कुरेले एवं डॉ. प्रदीप सेमवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
वक्ताओं ने कहा कि गीता का ज्ञान किसी एक जाति या धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समस्त विश्व के कल्याण का उपदेश करती है। श्रीमद्भगवद्गीता को कर्म करने की प्रेरणा का स्रोत बताया और कहा, अपने कर्तव्य का पालन करना ही श्रेष्ठ कर्म है। छात्रों को अर्जुन के समान जिज्ञासु शिष्य बनकर गुरु में निहित ज्ञान ग्रहण करने की शिक्षा दी। अवसाद रोग की चिकित्सा के लिए गीता एवं आयुर्वेद शास्त्र का ज्ञान लाभकारी है। उन्होंने चिकित्सकों को सलाह दी कि वे रोगी की चिकित्सा से पूर्व अपने मन व कर्म को श्रेष्ठ बनाएं, क्योंकि गीता और आयुर्वेद दोनों ही शरीर के साथ मन की चिकित्सा और आत्म कल्याण की भावना से कार्य करते हैं। बीएएमएस 2024 बैच के छात्र-छात्राओं ने गीता में विश्व शांति के उपाय, विद्यार्थी जीवन में गीता का महत्व, आधुनिक युग में गीता की आवश्यकता, आहार विवेचन और पुरुषार्थ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। संचालन चक्षु कुमारी व मदीहा खान ने किया। इस दौरान डॉ. प्रबोध येरावर, डॉ. आकांक्षा, डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. सुनील पांडेय, डॉ. ऋषि आर्य, डॉ. मन्नत मारवाह, डॉ. इला तन्ना, डॉ. अखिल जैन आदि मौजूद रहे।

 

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