उत्तरकाशी()। नेताला में अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय बना अचल प्रशिक्षण केंद्र और कोविड महामारी के समय करोड़ों की धनराशि खर्च कर बना आरपीसीआर लैब का भवन जर्जर बना है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और शासन-प्रशासन की अनदेखी के कारण सरकारी संपदा बरबाद हो रही है। केंद्र का निर्माण दूरस्थ क्षेत्र के एएनएम को प्रशिक्षण देने के लिए किया गया था। वहीं आरपीसीआर लैब के भवन में उच्च तकनीकी लैब स्थापित की जानी थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अपनी संपत्ति की स्थिति का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। नेताला में अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय अचल प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण इसलिए किया गया था कि सीमांत जनपद के युवाओं को अपने घर पर भी एएनएम का प्रशिक्षण मिल पाएगा लेकिन इसके भवन का कभी प्रयोग नहीं किया गया। उत्तराखंड बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब शायद यह केंद्र शुरू होने से युवाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षण मिलेगा लेकिन सरकारें बदली और समय के साथ इसका बहुमंजिला भवन जर्जर होने के कारण वीरान हो गया। कोविड महामारी के दौरान आरपीसीआर जैसी जांचों के लिए लोगों को देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही थी तो उस समय शासन-प्रशासन ने वहां पर केंद्र के नजदीक में खाली पड़ी भूमि पर करोड़ों की लागत से लैब भवन का निर्माण किया गया। अब दोनों भवनों का प्रयोग नहीं होने के कारण ग्रामीणों के घास और अन्य सामान रखने के काम में प्रयोग हो रहा है लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से इन भवनों के उचित प्रयोग के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। सीएमओ डॉ. बीएस रावत का कहना है कि केंद्र के संचालन के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। दो से तीन माह में इस पर कार्रवाई होने की उम्मीद है।