सरकार को यूक्रेन के अंदर जाकर करनी चाहिए छात्रों की मदद

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-यूक्रेन में फंसी पायल पंवार ने कोटद्वार पहुंचकर सरकार से की अपील
-कहा, यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की हालत है बहुत खराब, ठोस कार्रवाई की दरकार
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : सोमवार को स्टेशन रोड निवासी पायल पंवार यूक्रेन से अपने घर पहुंच गई। उनके सुरक्षित घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी देखते ही बनती थी। पायल ने कहा कि सरकार को यूक्रेन के बॉर्डर पर ही नहीं बल्कि यूक्रेन के अंदर भी छात्र-छात्राओं की मदद करनी चाहिए और उनके घर वापसी के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में छात्र-छात्राओं की हालत बहुत खराब है। वह बंकरों व मेट्रो स्टेशनों में छुपे हुए हैं, लेकिन जब भी कोई धमाका होता है तो बंकर व मेट्रो स्टेशन तक हिल जाते हैं।
पायल पंवार यूक्रेन से गत रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे दिल्ली एयर पोर्ट पर पहुंच गईं थी। दिल्ली में उनके पिता किशन पंवार उन्हें लेने पहुंचे थे। सोमवार को दिन के समय पायल पिता के साथ दिल्ली से कोटद्वार अपने घर पहुंची। यहां वह अपने परिवार से मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने कहा कि वह घर वापस आकर बहुत खुश हैं, लेकिन उनका भाई अनुराग अभी भी खारकीव में फंसा हुआ है। जिससे उन्हें काफी चिंता भी हो रही है। उन्होंने सरकार से अपील की कि यूक्रेन में फंसे अन्य छात्रों को निकालने के लिए कोई ठोस पहल की जाए। जिससे सभी छात्र-छात्राएं सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें।

कई किमी पैदल चलने के बाद पहुंचे बॉर्डर तक
पायल ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनका यूक्रेन से घर तक का सफर इतना आसान नहीं था। उन्हें बॉर्डर तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। क्योंकि यूक्रेन में ट्रांसपोर्ट पूरी तरह से ठप हो गया है। उन्होंने बताया कि फ्लाईट की टिकट भी तीन गुना तक महंगी कर दी गई है। जिससे छात्रों को वापस आने में परेशानी हो रही है।

स्लोवाकिया देश में प्रवेश कर चुके हैं शशांक व उनके साथी
भीमसिंहपुर कलालघाटी निवासी शशांक बलूनी यूक्रेन से बॉर्डर क्रॉस कर स्लोवाकिया देश में प्रवेश कर चुके हैं। उनके पिता अनिल बलूनी ने बताया कि उनकी लगातार बेटे से बात हो रही है। उनके लिए अब भोजन की व्यवस्था स्लोवाकिया व यूक्रेन की ओर से की जा रही है। जल्द ही शशांक भी फ्लाईट से भारत लौटा आएगा।

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