गिवईस्रोत, कालाबड़ सहित अन्य क्षेत्रों में बनी है धमक
ध्रुवपुर-कण्वाश्रम मार्ग पर चुनौती बन रहा आवागमन
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : जंगल से सटे आबादी क्षेत्रों में गुलदार की धमक थमने का नाम नहीं ले रही। आए दिन गुलदार गिवईस्रोत, कालाबड़ की गलियों में घूमता हुआ नजर आ रहा है। हर दिन गुलदार स्ट्रीट डाग्स व पालतू कुत्तों को अपना निवाला बना रहा है। लगातार शिकायत के बाद भी वन विभाग इस समस्या को लेकर लापरवाह बना हुआ है। ऐसे में कब मानव वन्य जीव संघर्ष हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। यही नहीं ध्रुवपुर-कण्वाश्रम मार्ग पर तो आमजन का आवागमन भी चुनौती बन गया है।

कोटद्वार का अधिकांश भाग लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र से सटा हुआ है। यही कारण है कि जंगल से सटे आबादी क्षेत्रों में जंगली जानवरों की धमक बनी रहती है। करीब एक माह पूर्व सनेह क्षेत्र में गुलदार ने घास लेने जा रही एक महिला पर हमला कर दिया था। एक सप्ताह पूर्व ही सनेह में गुलदार ने सुबह की सैर पर निकले बुजुर्ग पर भी हमला किया। कुछ दिन पूर्व शिवपुर क्षेत्र में भी गुलदार ने घर की छत में बैठी एक बुजुर्ग पर हमला किया। गिवईस्रोत व कालाबड़ क्षेत्र में हर रोज गुलदार गलियों में घूमता हुआ दिखाई दे रहा है। गिवईस्रोत निवासी संदीप सिंह, राम सिंह, सतेंद्र कुमार ने बताया कि क्षेत्र में पिंजरा लगवाने के लिए वह कई बार जनप्रतिनिधि व अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। बावजूद अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। हालत यह है कि शाम ढलते ही ग्रामीणों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे आधिक चिंता बच्चों व बुजुर्गों को लेकर बनी रहती है। वहीं, ध्रुवपुर-कण्वाश्रम मार्ग पर भी आए दिन गुलदार घूमता हुआ नजर आ रहा है। कई बार गुलदार सड़क किनारे हाथी सुरक्षा दीवार के ऊपर बैठा रहता है।