हाथरस कांड: सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पीड़िता की तस्वीर नहीं छापने के कानून पर कानून नहीं बना सकते

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नई दिल्ली,एजेंसी। उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए दुष्कर्म कांड की पीड़िता की तस्वीर मीडिया में प्रकाशित करने पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा किहम दुष्कर्म पीड़िता का फोटो नहीं छापने के कानून पर कानून नहीं बना सकते।इस बारे में याचिकाकर्ता सरकार से आग्रह कर सकता है।
याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एन वी रमन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति अनिरुद्घ बोस भी शामिल थे। पीठ ने कहा, ‘इन मामलों का कानून से कोई लेना देना नहीं है।’
पीठ ने कहा, ‘यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। इसके लिए समुचित कानून हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाएं होती हैं।’ शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि हम कानून पर कानून नहीं बना सकते। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता इस संबंध में सरकार से निवेदन कर सकता है। याचिका में यौन उत्पीड़न के मामलों में सुनवाई में होने वाली देरी के मुद्दे भी उठाए गए।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने 27 अक्टूबर को कहा था कि हाथरस मामले में सीबीआई जांच की निगरानी इलाहाबाद उच्च न्यायालय करेगा और सीआरपीएफ पीड़िता के परिवार और गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराएगा। न्यायालय ने अक्टूबर में कुछ याचिकाओं पर फैसला सुनाया था जिसमें घटना और अंतिम संस्कार के तौर तरीकों को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी।
बता दें, उप्र के हाथरस में 14 सितंबर को 19 वर्षीय एक दलित लड़की से चार लोगों ने कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया था। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार के दौरान 29 सितंबर को पीड़िता की मौत हो गई थी। प्रशासन ने लड़की के अभिभावकों की सहमति के बिना ही रात में उसका अंतिम संस्कार कर दिया था जिसकी काफी आलोचना हुई थी।

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