नई दिल्ली , बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में वह स्थिति देखने को मिली जो आखिरी बार जून 2004 में मनमोहन सिंह सरकार के समय बनी थी। विपक्ष के भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। विपक्ष की जिद : पहले राहुल, फिर पीएम कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सदन में कड़ा रुख अख्तियार कर रखा है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने स्पष्ट किया कि जब तक लोकसभा में राहुल गांधी को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक विपक्ष प्रधानमंत्री को सदन में बोलने नहीं देगा। राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब से जुड़े मुद्दे पर बोलना चाहते हैं, जिसे लेकर गतिरोध बना हुआ है।
लोकसभा की कार्यवाही पर असर
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे का दौर शुरू हो गया, जिसके चलते स्पीकर ने तीन बार कार्यवाही स्थगित की:
पहली बार : महज 65 सेकंड के भीतर।
दूसरी बार : 5 मिनट के भीतर।
तीसरी बार : 2 मिनट के भीतर।
राज्यसभा में तीखी नोकझोंक
लोकसभा का मुद्दा राज्यसभा में भी गूंजा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जब राहुल गांधी को बोलने से रोकने का मुद्दा उठाया, तो सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई:
किरेन रिजिजू (संसदीय कार्यमंत्री): उन्होंने खड़गे से कहा कि राहुल गांधी नियम नहीं मानते, उन्हें समझाना आपकी जिम्मेदारी है।
जेपी नड्डा (बीजेपी अध्यक्ष): उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खड़गे जी, कांग्रेस को ‘अबोध बालक’ का बंधक न बनने दें। राज्यसभा में लोकसभा के विषयों पर चर्चा नहीं हो सकती।
विपक्ष का वॉकआउट
हंगामे और सत्ता पक्ष के जवाबों के बाद विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 5 बजे राज्यसभा में अपना भाषण दे सकते हैं, हालांकि लोकसभा में उनका संबोधन नहीं हो सका।
मुख्य तथ्य : 10 जून 2004 को भी विपक्ष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने नहीं दिया था। आज की घटना ने उस पुराने संसदीय इतिहास को दोहरा दिया है।
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