देहरादून। विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस की पूर्व संध्या पर मायरा केयर फाउंडेशन ने उत्तरांचल प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर समाज में ऑटिज़्म (एएसडी) को लेकर जागरूकता और समावेशिता का कड़ा संदेश दिया। फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. निशांत नवानी ने कहा कि देश में ऑटिज़्म के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में परिवारों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सह-संस्थापक डॉ. जया नवानी ने बताया कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में संसाधनों की कमी से ऐसे बच्चे अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर पहचान और हस्तक्षेप से 80% मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। संस्था की ऑपरेशन्स हेड अनीता शर्मा ने देहरादून में ‘होलिस्टिक लर्निंग सेंटर’ खोलने की बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस सेंटर में एक ही छत के नीचे आधुनिक थेरेपी, विशेष शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलेंगी। 2026 के अंत तक 50 बच्चों को इसका लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। शर्मा ने कहा कि ऑटिज़्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की प्रतिभा है जिसे समर्थन की जरूरत है।