नईदिल्ली,पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान का मामला गरमा गया है। इस मामले पर केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। बंगाल के मुख्य सचिव को शाम 5 बजे तक जवाब देने के लिए कहा गया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि यह घटनाक्रम शर्मनाक है और इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ।
दरअसल, राष्ट्रपति मुर्मू 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचीं थीं। पहले ये कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में होने वाला था। हालांकि, सुरक्षा और अन्य कारणों का हवाला देते हुए अधिकारियों ने कार्यक्रम को बिधानगर की जगह बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोपालपुर में शिफ्ट कर दिया। राष्ट्रपति ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बंगाल सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती, इसलिए उन्हें आने से रोका गया।
राष्ट्रपति जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो उन्हें रिसीव करने केवल सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ही मौजूद थे। हालांकि, प्रोटोकॉल कहता है कि राष्ट्रपति को रिसीव करने के लिए मुख्यमंत्री या किसी मंत्री का मौजूद होना जरूरी है। राष्ट्रपति ने इस पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, आमतौर पर जब राष्ट्रपति आती हैं तो मुख्यमंत्री को उनका स्वागत करना चाहिए और अन्य मंत्रियों को भी उपस्थित रहना चाहिए, लेकिन ममता बनर्जी नहीं आईं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना को शर्मनाक और अभूतपूर्व बताया। उन्होंने लिखा, लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में अपार दुख पहुंचाया है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी ममता सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, टीएमसी सरकार ने आज अपने अराजक आचरण से और भी निम्न स्तर को छू लिया है। प्रोटोकॉल की घोर अवहेलना करते हुए उन्होंने राष्ट्रपति का अपमान किया है। इस घटना ने टीएमसी सरकार के भीतर गहरी खामी को उजागर कर दिया है। हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति का यह अपमान हमारे राष्ट्र और हमारे संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों का अपमान है।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, भाजपा इतनी नीच हरकत पर उतर आई है कि बंगाल को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति का इस्तेमाल कर रही है। हम उनका सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें राजनीति और भाजपा के एजेंडे के लिए भेजा गया है। आप भाजपा के जाल में फंस गए हैं। अगर आप साल में एक बार आते हैं, तो मैं आपका स्वागत करूंगी। लेकिन आप साल में 50 बार आते हैं, तो मैं आपको इतना समय कैसे दे पाऊंगी?
राष्ट्रपति के कथित अपमान के खिलाफ सड़क पर उतरे आदिवासी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान के आरोप को लेकर आदिवासी समाज के लोगों ने रविवार को सिलीगुड़ी महकमा के फांसीदेवा ब्लॉक में विरोध प्रदर्शन किया। बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन कार्यक्रम के दौरान प्रशासन और राज्य सरकार के सहयोग न करने का आरोप स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लगाया था। उन्होंने कहा था कि संताल समुदाय को भ्रमित किया गया, सम्मेलन स्थल बदला गया और प्रशासन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।इसी मुद्दे को लेकर आज फांसीदेवा ब्लॉक के विधाननगर स्थित संतोषिणी मैदान से जगन्नाथपुर मोड़ तक विरोध मार्च निकाला गया, जो फिर मैदान में आकर समाप्त हुआ। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। इस दौरान फांसीदेवा की विधायक दुर्गा मुर्मू ने आरोप लगाया कि गलत जानकारी देकर सम्मेलन को गैर-आदिवासी इलाके में ले जाया गया, जिसके कारण कई आदिवासी लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। उनका कहना था कि कई लोगों को कार्यक्रम स्थल में प्रवेश तक नहीं दिया गया और प्रशासन ने भी सहयोग नहीं किया। उन्होंने राज्य सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में मौजूद नहीं थी। विधायक ने कहा कि राष्ट्रपति जब विधाननगर पहुंची तो वहां कम समय में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज की मौजूदगी देखकर उन्हें पूरी स्थिति का अंदाजा हो गया।