बंगाल के दो जिलों में बांग्लादेशी पर्यटकों के लिए होटल और लॉज के दरवाजे बंद

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कोलकाता , बांग्लादेश में एक सप्ताह में दो हिंदू युवक को पीट-पीटकर मारने की घटना को लेकर देश भर में गुस्से की लहर है। विरोध की ज्वाला जल रही है और बंगाल से लेकर मध्य प्रदेश तक घटना को लेकर उबाल जारी है। ऐसे में बंगाल के दो जिलों दार्जिलिंग और माल्दा में होटल कारोबारियों ने बांग्लादेशी पर्यटकों के लिए अपने होटल और लॉज के दरवाजे बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार और हाल ही में परिधान कारखाने में काम करने वाले हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की गई हत्या के विरोध में लिया गया है। होटल संगठनों का कहना है कि मौजूदा हालात में यह उनका सामूहिक और नैतिक विरोध है। जिन दो जिलों में यह फैसला लिया गया है, वे दार्जिलिंग और माल्दा हैं। दोनों ही जिले राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित हैं और बांग्लादेश से अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। हालांकि दार्जिलिंग जिले का सीमावर्ती क्षेत्र अपेक्षाकृत छोटा है, जबकि अल्पसंख्यक बहुल मालदा जिले की सीमा अधिक विस्तृत है। इन दोनों जिलों के स्थानीय चेंबर ऑफ कॉमर्स ने भी होटल कारोबारियों के फैसले का समर्थन किया है। माल्दा होटल और रेस्टोरेंट आनर्स एसोसिएशन के सचिव कृष्णेंदु चौधरी ने बताया कि बांग्लादेशी पर्यटकों को कमरे न देने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जिले के किसी भी होटल में एक भी बांग्लादेशी पर्यटक नहीं ठहरा है। मेडिकल वीजा पर इलाज के लिए आने वाले लोगों को इस फैसले में शामिल किया जाए या नहीं, इस पर जल्द ही एक और बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। वहीं, दार्जिलिंग जिले में सिलीगुड़ी होटलियर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने और सख्त रुख अपनाया है। संगठन ने बांग्लादेशी पर्यटकों के साथ-साथ मेडिकल वीजा और छात्र वीजा पर आने वालों को भी इस प्रतिबंध के दायरे में शामिल करने का फैसला किया है। एसोसिएशन के सचिव उज्जल घोष ने कहा कि बांग्लादेश के नेताओं द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर, चिकन नेक सेक्टर और सेवन सिस्टर्स को लेकर दिए जा रहे असंवेदनशील बयान बेहद आपत्तिजनक हैं। इसके साथ ही बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएं चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुकी हैं। उल्लेखनीय है कि, दीपु चंद्र दास की हत्या के बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया है। दिल्ली, कोलकाता, भोपाल और हैदराबाद सहित कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए। बताया गया है कि 25 वर्षीय दीपु चंद्र दास पर एक सहकर्मी ने कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया था। इसके बाद कट्टरपंथी और उग्र तत्वों से जुड़ी भीड़ ने कारखाने में घुसकर उसे बाहर घसीटा, बेरहमी से पीटा और फिर एक पेड़ से बांधकर उसके शव को आग के हवाले कर दिया। इस घटना ने न केवल बांग्लादेश बल्कि भारत में भी गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।

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