रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने दिसंबर 2025 में स्वास्थ्य और विकास पर केंद्रित ‘एहेड2025’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और पाँच-दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, नीति-निर्माण और सामाजिक प्रभाव को जोड़ने वाले अकादमिक प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान की। आईआईटी रुड़की की एहेड लैब, जिसे डॉ. प्रताप सी. मोहंती ने स्थापित किया है, ने इस सातवें प्रमुख शैक्षणिक आयोजन की मेज़बानी की। सम्मेलन का विषय था “स्वास्थ्य और विकास में वैश्विक व्यवधान: चुनौतियाँ, नवाचार और इक्कीसवीं सदी के लिए मार्ग”, जिसमें स्वास्थ्य प्रणालियों की लचीलापन क्षमता, जलवायु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य, वित्तपोषण, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, प्रौद्योगिकीय रूपांतरण और क्षेत्रीय असमानताओं जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
सम्मेलन में दस विषयगत ट्रैक शामिल थे—जिनमें स्वास्थ्य वित्तपोषण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य, लैंगिक असमानताएँ, वृद्धावस्था और कल्याण, पोषण और मानव पूंजी, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियाँ आदि प्रमुख रहे। उद्घाटन सत्र को प्रो. वी. सी. श्रीवास्तव (आईआईटी रुड़की), प्रो. भानु दुग्गल (एम्स ऋषिकेश) और प्रो. स्मिता झा (आईआईटी रुड़की) ने संबोधित किया।
मुख्य भाषण प्रो. साबु पद्मदास (यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथैम्प्टन, यू.के ), डॉ. मार्गरेट त्रियाना (विश्व बैंक), डॉ. सुमन सेठ (यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स, यू.के), प्रो. प्रकाश सी. कांडपाल और प्रो. दिब्येंदु मैती (दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स) ने दिए। सम्मेलन में विश्व बैंक, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नोट्रे डेम (यूएसए), आईआईटी कानपुर, जेएनयू और बीएचयू जैसे संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही।
सभी शोध पत्रों की कठोर सहकर्मी-समीक्षा की गई और सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार डॉ. बसंत के. पांडा (जनसंख्या परिषद, भारत) तथा तनिषा (लैंकेस्टर विश्वविद्यालय, यू.के) को प्रदान किए गए।
सम्मेलन के पूरक के रूप में, “स्वास्थ्य और कल्याण में बड़े-पैमाने के डेटा विश्लेषण” पर पाँच-दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका संयोजन डॉ. मनीष के. अस्थाना ने किया। इसने युवा शोधकर्ताओं को डेटा-आधारित नीति विश्लेषण की नई क्षमताएँ प्रदान कीं।
समापन सत्र में घोषणा की गई कि एहेड2026 का आयोजन 14–16 दिसंबर 2026 को आईआईटी रुड़की में होगा। इस प्रकार, आईआईटी रुड़की ने स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय ज्ञान साझेदार और वैश्विक शैक्षणिक मंच के रूप में अपनी भूमिका को और मज़बूत किया।