हल्द्वानी()। उत्तराखंड की सबसे व्यस्त तहसीलों में शुमार हल्द्वानी तहसील में पिछले चार महीनों से जमीनों का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इससे 10,000 से अधिक रजिस्ट्रियों की दाखिल-खारिज लंबित हो गई हैं, जिसके कारण संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोग भारी परेशानी में हैं। राज्य सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के निर्देश जारी किए थे, ताकि पुरानी खामियों को दूर किया जा सके। लेकिन यह व्यवस्था धरातल पर लागू नहीं हो पा रही है, जिससे आम नागरिकों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हल्द्वानी तहसील में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक रजिस्ट्रियां होती हैं। फिर भी दाखिल-खारिज न होने के कारण खतौनी अपडेट नहीं हो पा रही है। प्रभावित लोगों का कहना है कि नई रजिस्ट्री के बावजूद नामांतरण न होने से बैंक लोन, भवन निर्माण अनुमति, बिजली-पानी कनेक्शन, सरकारी योजनाओं का लाभ और अन्य कानूनी कार्य ठप हो गए हैं। कई मामलों में पुरानी खतौनी के आधार पर लेन-देन जारी होने से धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, हल्द्वानी तहसील में करीब 10 हजार से अधिक जमीनों के दाखिल-खारिज लटके हुए हैं। जिन लोगों की रजिस्ट्री हो चुकी है, लेकिन दाखिल-खारिज नहीं हुआ, वे रोज तहसील के चक्कर काट रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक सिस्टम में तकनीकी सुधार नहीं किए जाते और संबंधित अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया जाता, तब तक यह समस्या जस की तस बनी रहेगी। रजिस्ट्रार कार्यालय भेजता था तहसील पहले रजिस्ट्री होने के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेज रख लिए जाते थे। रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर के बाद रजिस्ट्री की एक फोटोस्टेट कॉपी और मूल दस्तावेज तहसीलदार कार्यालय भेजे जाते थे। तहसील कार्यालय में दाखिल-खारिज की निर्धारित तिथि दी जाती थी। निर्धारित दिन दाखिल-खारिज पूरा होने के बाद रजिस्ट्रीधारी अपनी मूल रजिस्ट्री ले जाता था। लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने के बाद इस प्रक्रिया को पूरी तरह लागू करना मुश्किल साबित हो रहा है। तकनीकी खामियों और सिस्टम की अपर्याप्त तैयारी के कारण पुरानी व्यवस्था गड़बड़ा गई है, जिससे दाखिल-खारिज का कार्य ठप पड़ा हुआ है। मैन्युअल प्रक्रिया भी हुई बंद मैन्युअल प्रक्रिया भी बंदऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ लोग पीछे के दरवाजे से मैन्युअल रजिस्ट्री करवाने का प्रयास कर रहे थे। इस अनियमित कार्य को अंजाम देने के लिए कुछ लोगों को अवैध तरीके से आउटसोर्स किया गया था। हालांकि, कुछ समय पहले जिलाधिकारी (डीएम) द्वारा की गई छापेमारी के बाद यह प्रक्रिया भी पूरी तरह बंद हो गई है।
गायब आर-5 रजिस्टर गायब, दाखिल-खारिज प्रक्रिया प्रभावित : तहसील में दाखिल-खारिज के लिए दो रजिस्टर रखे जाते थे—एक का नाम आर-5 और दूसरे का आर-6। आर-5 रजिस्टर में उन रजिस्ट्रियों को दर्ज किया जाता था, जिनका दाखिल-खारिज होना बाकी था। वहीं, आर-6 रजिस्टर में उन रजिस्ट्रियों का विवरण दर्ज होता था, जिनका दाखिल-खारिज पूरा हो चुका होता था। वर्तमान स्थिति यह है कि आर-6 रजिस्टर तो मौजूद है, लेकिन आर-5 रजिस्टर गायब पाया गया है। इस कारण दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में और अधिक असमंजस तथा देरी हो रही है।