नोएडा में युवराज मेहता की मौत के मामले में हाईकोर्ट सख्त, सिस्टम की लापरवाही पर उठाए सवाल

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नोएडा , नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में हाईकोर्ट सख्त है। कोर्ट ने सिस्टम की लापरवाही और बचाव में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है और सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है। हाईकोर्ट का कहना है कि युवराज की जान बचाई जा सकती थी लेकिन जवाबदेह अधिकारियों की सुस्ती और सही समय पर कार्रवाई न होने की वजह से उनकी मौत हो गई। इस मामले में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है। हाईकोर्ट ने खास तौर पर इस बात पर संदेह जताया कि हादसे के वक्त सेक्टर 150 में मौके पर अफसर क्यों मौजूद नहीं थे या उनकी उपस्थिति राहत कार्यों में प्रभावी क्यों नहीं रही। कोर्ट ने पूछा कि आखिर क्यों इंजीनियर युवराज को समय रहते बचाया नहीं जा सका। मामले में नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में सामने आया कि कई स्तरों पर गंभीर चूक और लापरवाही हुई, जिसने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य को प्रभावित किया।
परिजन अब भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। हाईकोर्ट ने सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जवाबदेही तय करना और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है।
गौरतलब है कि युवराज मेहता जूनियर इंजीनियर और लंबे समय से प्रोजेक्ट इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। दो महीने पहले जनवरी को ग्रेटर नोएडा में सेक्टर-150 में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की एक बिल्डर के प्लॉट में भरे पानी में गिरने से मौत हो गई थी। वह घंटों तक मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन उसे समय पर नहीं बचाया जा सका। बताया जा रहा है कि युवराज की मौत हार्ट फेलियर/कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई थी। जांच में सामने आए तथ्य चौंकाने वाले थे। अब हाईकोर्ट ने भी सिस्टम की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए जवाब तलब किया है।

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