जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पेयजल लाइन बिछाने के लिए वार्डों में खोदी गई सड़कों की मरम्मत तो कर दी गई है। लेकिन, यह काम इतनी लापरवाही से किया गया है कि हल्की वर्षा से ही सड़कें तालाब में तब्दील हो गई हैं। सड़क पर जल निकासी की कोई व्यवस्था तक नहीं बनाई गई है। जलभराव के कारण राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि समय रहते व्यवस्थाओं को बेहतर नहीं बनाया गया तो समस्या वर्षा काल में विकराल होगी।
शहर के घरों में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति के लिए उत्तराखंड अर्बन सेंटर डेपलपमेंट एजेंसी (यूयूएसडीए) की ओर से पेयजल लाइन बिछाने का कार्य किया गया। नियमानुसार, सड़कों को खोदकर पेयजल लाइन बिछाने के बाद संबंधित कार्यदायी संस्था ने ही सड़क की मरम्मत भी करनी थी। संस्था बेहतर तरीके से कार्य करें इसकी जिम्मेदारी नगर निगम व प्रशासन की थी। लेकिन, सड़क मरम्मत के नाम पर संबंधित संस्था केवल खानापूर्ति कर चली गई। हालत यह है कि अधिकांश वार्डों में मरम्मत के दौरान वर्षा जल निकासी की व्यवस्था तक नहीं बनाई गई है। नतीजा, एक दिन पूर्व हुई वर्षा से सड़कें तालाब में तब्दील हो गई। कई स्थानों पर पानी लोगों के घरों में भी घुसने लगा। जबकि, पूर्व में जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को बेहतर तरीके से निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण करने के भी निर्देश दिए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अभी हल्की वर्षा में भी स्थिति बिगड़ गई है तो वर्षाकाल में हालात और अधिक गंभीर हो जाएंगे। सरकारी सिस्टम को जल्द से जल्द व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।
बीमारियों का खतरा
जगह-जगह जलभराव होने से वार्डवासियों को संक्रामक बीमारियों का भी खतरा सताने लगा है। लोगों का कहना है कि पानी कई दिनों तक सड़क पर ही भरा रहता है। ऐसे में दुर्गंध व गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। मच्छर पनपने से डेंगू का भी खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में सबसे अधिक चिंता बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बनी हुई है।