उत्तराखंड में 50 प्रतिशत जले कुमाऊं के जंगल, 1205़ 81 हेक्टेयर आग की चपेट में

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हल्द्वानी। उत्तराखंड में फारेस्ट फायर सीजन को दो महीने एक सप्ताह बीत चुका है। 15 जून तक का समय वन विभाग के लिए चुनौतियों वाला है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की अलग-अलग डिवीजनों में अभी तक 1205़81 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। इस आंकड़े बढ़ाने में कुमाऊं की चार डिवीजनों की आग सबसे बड़ी वजह है।
अल्मोड़ा वन प्रभाग, बागेश्वर वन प्रभाग, पिथौरागढ़ वन प्रभाग और सिविल सोयम डिवीजन अल्मोड़ा में मिलाकर अब तक 640 हेक्टेयर जंगल जला है। वनकर्मियों से लेकर अफसर तक आग की इन घटनाओं से परेशान है। कुमाऊं की अल्मोड़ा डिवीजन में आग की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां बुधवार तक 262़65 जंगल को नुकसान पहुंच गया था।
सिविल सोयम डिवीजन अल्मोड़ा में 87़25 हेक्टेयर, बागेश्वर डिवीजन मेंं 112़85 हेक्टेयर और पिथौरागढ़ डिवीजन में 178़25 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आया। इन चारों डिवीजन में चीड़ वन होना भी आग लगने की मुख्य वजह है।
मौसम में नमी की मात्रा का खत्म होना और भौगोलिक परिस्थितियों के चलते भी आग तेजी से आगे बढ़ती है। ऐसे में 15 जून तक संकट की स्थिति रहेगी। वन प्रभाग, सिविल डिवीजन और वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र मिलाकर उत्तराखंड में अभी तक 836 जगहों पर जंगलों में आग लग चुकी है। कई जंगल ऐसे है जहां कई दिनों तक आग सुलगती रही।
उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग से अभी तक साढ़े 15 हजार पेड़ जलकर राख हो चुके हैं। इसके अलाव 19 हेक्टेयर से अधिक प्लांटटेशन एरिया में नुकसान हुआ। पर्यावरणीय क्षति का आंकलन 33 लाख पार हो चुका है।

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