महापौर जीतने के बाद भी पार्षदों के आंकड़े को नहीं छू पाई भाजपा
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने महापौर की कुर्सी पर कब्जा तो कर दिया है। लेकिन, नए बोर्ड में निर्दलीय पार्षदों का दबदबा देखने को मिलेगा। दरअसल, निगम में किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो-तिहाई आंकड़ा जरुरी है। वर्तमान में चालीस वार्डाें में भाजपा के मात्र 18 पार्षद ही जीतकर आए हैं। जबकि, 13 निर्दलीय पार्षद सदन में नजर आएंगे।
कोटद्वार निकाय चुनाव में भाजपा महापौर के प्रत्याशी शैलेंद्र रावत ने जीत दर्ज की। महापौर का ताज तो भाजपा को मिल गया। लेकिन, प्रस्ताव को पारित करने के लिए भाजपा दो-तिहाई आंकड़े को नहीं छू पाई। चालीस वार्डों में भाजपा के नीरुबाला खंतवाल, रितु चमोली, सौरभ नौडियाल, सुभाष पांडे, ज्योति भाजपा के टिकट पर फिर से सदन में पहुंचे। जबकि, अनिल रावत, पदमेंद्र सिंह कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए और भाजपा के टिकट पर लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचे। आंकड़ों की बात करें तो वर्तमान बोर्ड में कांग्रेस के नौ और भाजपा के 18 पार्षद सदन में पहुंचे हैं। जबकि 13 निर्दलीय भी सदन में पहुंचे हैं। इन निर्दलीय में कुछ ऐसे भी हैं, जो भाजपा कार्यकर्ता थे। लेकिन, टिकट न मिलने के कारण उन्होंने निर्दलीय के रूप में ताल ठोंकी और जीत कर सदन में पहुंचे। भाजपा ने चुनाव के दौरान इन्हें निष्कासित कर दिया था। लेकिन, अब यही पार्षद भाजपा को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में मदद करेंगे। माना यह जा रहा है कि भाजपा पूर्व की भांति इस मर्तबा भी सदन में सदस्य मनोनीत करेगी। हालांकि यह भी उम्मीद है कि निर्दलीय पार्षद भाजपा को अपना समर्थन दे सकते हैं। सदन में पार्षदों के कई नए चेहरे भी नजर आएंगे।