सिंधु जल संधि निलंबन के बीच भारत का बड़ा एक्शन, चिनाब पर 3200 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी; पाकिस्तान की टेंशन बढ़ी

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नई दिल्ली ,। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान के साथ 1960 में की गई सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस संधि के निलंबन के बाद से ही भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में अपनी जल विद्युत परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ा रही है। इसी कड़ी में अब पर्यावरण मंत्रालय के तहत एक विशेषज्ञ पैनल ने किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बनने वाले 260-मेगावाट के ‘दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढढ्ढÓ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है।
3200 करोड़ का प्रोजेक्ट, संधि निलंबन के बाद मिली रफ्तार
दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढढ्ढ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की योजना काफी पहले बनाई गई थी, लेकिन अब इसे लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। दिसंबर 2025 में हाइडल प्रोजेक्ट्स पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने अपनी 45वीं बैठक में इसे आगे बढ़ाने की मंजूरी दी। समिति ने स्पष्ट किया कि हालांकि प्रोजेक्ट के पैरामीटर मूल रूप से 1960 की संधि के प्रावधानों के अनुसार प्लान किए गए थे, लेकिन वर्तमान में यह संधि 23 अप्रैल 2025 से प्रभावी रूप से निलंबित है। अब इस रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट के लिए निर्माण टेंडर जारी किए जाएंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत 3,200 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
क्या है दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढढ्ढ का प्लान?
यह नई परियोजना मौजूदा 390 मेगावाट के दुलहस्ती स्टेज-ढ्ढ हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का ही विस्तार है, जिसे एनएचपीसी (हृ॥क्कष्ट) द्वारा 2007 से संचालित किया जा रहा है। नई योजना के तहत, स्टेज-ढ्ढ पावर स्टेशन से निकलने वाले पानी को 3,685 मीटर लंबी और 8.5 मीटर व्यास वाली एक अलग सुरंग के जरिए मोड़ा जाएगा। इस प्रोजेक्ट में एक भूमिगत पावरहाउस का निर्माण भी शामिल है, जिसमें 130 मेगावाट की दो इकाइयां होंगी। यहां से सालाना 260 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा।
भारत की आक्रामकता और अन्य प्रोजेक्ट्स
जब सिंधु जल संधि लागू थी, तब पाकिस्तान के पास सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी पर अधिकार था, जबकि भारत के पास रावी, ब्यास और सतलुज का नियंत्रण था। लेकिन संधि के निलंबित होने के बाद केंद्र सरकार सिंधु बेसिन में कई रुकी हुई हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं पर तेजी से आगे बढ़ रही है। दुलहस्ती के अलावा सवालकोट, रतले, बुरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीरथाई जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।
पाकिस्तान की खेती पर गहरा संकट
भारत के इस कदम से पाकिस्तान की चिंताएं और बढ़ गई हैं। संधि के स्थगित होने के बाद से ही पाकिस्तान ने कई बार भारत पर झेलम और चिनाब नदियों का पानी रोकने का आरोप लगाया है। हाल ही में पाकिस्तान की एक आंतरिक रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया था कि चिनाब नदी के बहाव में कमी दर्ज की गई है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी भयावह है क्योंकि वहां की 80 फीसदी खेती सिंधु नदी बेसिन से मिलने वाले पानी पर निर्भर है। अगर पानी के बहाव में कमी आती है, तो पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ना तय है।

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