नई दिल्ली ,। पश्चिम एशिया में लगातार गहराते युद्ध के संकट के बीच ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत ने एक ऐसा कूटनीतिक चमत्कार कर दिखाया है, जिसे सामान्य तौर पर असंभव माना जाता था। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की अभूतपूर्व सक्रियता के चलते ईरान से भारतीयों को सड़क मार्ग के जरिए अर्मेनिया और अजरबेजान सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि अर्मेनिया और अजरबेजान न सिर्फ एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं, बल्कि भारत के साथ भी अजरबेजान के रिश्ते काफी तनावपूर्ण रहे हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ के दौरान अजरबेजान ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया था, लेकिन भारत की कूटनीतिक ताकत के आगे अब उसने भी मदद के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं।
दो दिन में 640 नागरिकों का सफल रेस्क्यू, 284 श्रद्धालु भी शामिल
इस बेहद जटिल और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद पिछले दो दिनों के भीतर ईरान से 640 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इनमें से 550 नागरिकों को अर्मेनिया और 90 भारतीयों को अजरबेजान की सीमा में सफलतापूर्वक पहुंचाया गया है, जहां से अब उन्हें स्वदेश या अन्य सुरक्षित स्थानों पर भेजने की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मिशन की जानकारी देते हुए बताया कि तेहरान से बाहर निकाले गए इन नागरिकों में 284 वे श्रद्धालु शामिल हैं, जो वहां धार्मिक यात्रा पर गए हुए थे।
ठप संचार और खतरे के साये में डटा है भारतीय दूतावास
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस वक्त ईरान में लगभग 9,000 भारतीय रह रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या पढ़ाई करने गए छात्रों की है। इसके अलावा कई कारोबारी, धार्मिक यात्री और समुद्री जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारी भी वहां फंसे हुए हैं। मौजूदा युद्ध जैसे हालातों में भारतीय मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकता छात्रों और अन्य संवेदनशील समूहों को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंचने के कारण ईरान में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह अस्थिर हो गई है और संचार के साधन भी लगभग ठप पड़ चुके हैं। कई इलाकों में तो सिर्फ सरकारी अनुमति से ही संपर्क साधा जा पा रहा है। इन जानलेवा और मुश्किल परिस्थितियों के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी भारी जोखिम उठाकर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं।
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