जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : हेमनदास सरस्वती शिशु मंदिर जानकीनगर में इगास बग्वाल से पूर्व एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों को इगास व बग्वाल कार्यक्रम के महात्म्य की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य प्रदीप नौटियाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और सभ्यता के प्रचार-प्रसार के लिए आगे आने की अपील की। कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिलता है। इसके उपरांत विद्यार्थियों ने बेडू पाको बारमासा.., मैं पहाड़न मेरा ठुमका पहाड़ी.. सहित अन्य गीतों पर नृत्य प्रस्तुत किए। बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शिक्षक अंचल कुमार ने विद्यार्थियों को इगास व बग्वाल के महत्व के बारे में जानकारी दी। कहा कि दीपावली के 11 दिन बाद इगास व बग्वाल पर्व मनाया जाता है। यह उत्तराखंड की संस्कृति व सभ्यता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है। एक मान्यता के अनुसार, गढ़वाल के सैनिक माधो सिंह भंडारी युद्ध जीतकर दीपावली के 11वें दिन वापस आए थे। इसी खुशी में गढ़वाल के लोगों ने उनके स्वागत में दीपक जलाए, इसे बूढ़ी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है।