डॉ.अनिल जोशी को इंसा फेलो ऑफ द नेशन अकादमी सम्मान

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देहरादून () । हेस्को के संस्थापक पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ.अनिल प्रकाश जोशी को उनके लंबे अनुभव, समाज में विज्ञान-आधारित कार्यों के लिए देश की सर्वोच्च संस्था इंडियन नेशनल साइंस अकादमी-इंसा ने फेलो ऑफ द नेशनल अकादमी से सम्मानित किया है। डॉ.अनिल जोशी विगत 40 वर्षों से विज्ञान को ग्रामीण-मुखी बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। यह कार्यक्रम एक भव्य समारोह में जेएनयू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में हुआ। इस कार्यक्रम में इंसा के सभी भूतपूर्व अध्यक्ष, वर्तमान अध्यक्ष डॉ. आशुतोष शर्मा, भावी अध्यक्ष डॉ. शेखर पांडे भी शामिल थे। इस विशिष्ट सम्मान को प्राप्त करने वालों में डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के अलावा एटोमिक एनर्जी कमीशन चेयरमैन डॉ. अजीत मोहंती, उद्योगपति मुकेश अंबानी, आदित्य बिरला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला भी शामिल थे।
डॉ. जोशी ने अपने संबोधन में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों से कहा कि आज दुनिया में प्रकृति और पर्यावरण को लेकर जो बड़े परिवर्तन हो रहे हैं, वे विज्ञान के समुचित दिशा में न पाने का परिणाम भी हैं। 17वीं सदी के बाद विज्ञान द्वारा बनाए गए अधिकांश उत्पादों ने किसी न किसी रूप में प्रकृति पर बोझ बढ़ाया है। आज दुनिया भर में प्राण, वायु और पानी संकट में पड़ चुके हैं। इसलिए आवश्यक है कि देश और दुनिया के वैज्ञानिक प्रकृति के विज्ञान पर भी कार्य करें। आज प्रकृति-विज्ञान की ओर झुकाव हमारी मजबूरी भी हो चुकी, क्योंकि अब विश्व में पारिस्थितिक संकट गहरा चुका है। पूर्व में विज्ञानियों ने अपनी मेहनत से आर्थिक संकट को जिस तरह दूर किया और भारत को सक्षम बनाया, उसी तरह अब इकोलॉजिक क्राइसिस से निपटने के लिए भी वैज्ञानिकों को कमर कसनी होगी। डॉ. जोशी ने इंसा पदाधिकारियों से अपील की कि वह अपने कार्यक्रमों में प्रकृति-विज्ञान को एक अहम स्थान दे, ताकि हम भविष्य में प्रकृति-समर्थ विकास की कल्पना कर सकें। डॉ. अनिल जोशी और हेस्को एक दूसरे के पूरक डॉ. अनिल प्रकाशजोशी ने 1986 में हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हेस्को की स्थापना की थी। हेस्को का काम अनुसंधान, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रगति के साथ एकीकृत करके स्थायी तकनीकों जैसे जल संरक्षण, जैविक खेती और बायोगैस के उपयोग को बढ़ावा दिया है। सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी)- डॉ. जोशी ने जीडीपी के समानांतर जीईपी (सकल पर्यावरण उत्पाद) की अवधारणा पेश की, जो पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को मापता है। उत्तराखंड सरकार ने 2021 में इसे एक विकास उपाय के रूप में अपनाया है। डॉ. जोशी को उनके योगदान के लिए 2006 में पद्म श्री और 2020 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

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