भारत पहुंची इजरायल की सबसे घातक मशीन गन, खासियतें जान कांप उठेंगे विरोधी

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नई दिल्ली , भारतीय सेना की ताकत में अब कई गुना इजाफा होने जा रहा है। दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए इजरायली हथियार कंपनी इजरायल वेपन्स इंडस्ट्रीज ने भारत को अपनी सबसे घातक और हल्की मशीन गन की पहली खेप सौंप दी है। यह ऐतिहासिक रक्षा डील ‘मेक इन इंडिया पहल के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए पूरी की जा रही है। पिछले ही वीकेंड 2000 ‘नेगेवÓ लाइट मशीन गन की पहली खेप भारत की धरती पर पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि इन अत्याधुनिक हथियारों की डिलीवरी पीएलआर सिस्टम्सके जरिए हुई है, जो इजरायल वेपन्स इंडस्ट्रीज और भारत के अडानी ग्रुप का एक जॉइंट वेंचर है। यह भारत की पहली ऐसी निजी कंपनी बन गई है जो छोटे हथियारों और गोला-बारूद का निर्माण कर रही है।
दीवार और मजबूत बंकरों को चीरने में माहिर है यह ‘ब्रह्मास्त्र
इजरायल की नेगेव 7.62म51 दुनिया की सबसे हल्की और मारक लाइट मशीन गन में से एक मानी जाती है, जिसका इस्तेमाल खुद इजरायली डिफेंस फोर्सेज (ढ्ढष्ठस्न) करती है। इसका हल्का वजन और 7.62 मिमी का गोला-बारूद इसे इतना खतरनाक बनाता है कि यह पलक झपकते ही दुश्मनों की मजबूत दीवारों और कंक्रीट के बंकरों को भी आसानी से भेद सकती है। शहरी इलाकों में होने वाली जंग और बेहद महत्वपूर्ण मिशनों के लिए इसे अचूक माना जाता है। यह गन सेमी-ऑटोमैटिक और फुली ऑटोमैटिक, दोनों मोड्स में आग उगल सकती है। इसे सिर्फ हाथों में ही नहीं, बल्कि भारतीय थल सेना के बख्तरबंद वाहनों, वायुसेना के हेलीकॉप्टरों और नौसेना के प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से फिट किया जा सकता है। कम रोशनी या अंधेरे में सटीक निशाना लगाने के लिए इसमें पिकाटिनी रेल्स और ट्रिटियम नाइट साइट्स जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
41 हजार हथियारों का है मेगा ऑर्डर
भारत ने अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए इजरायल को कुल 41,000 यूनिट्स का बड़ा ऑर्डर दिया है। पहली खेप में 2000 मशीन गन मिलने के बाद, इसी साल के अंत तक 4000 और गन भारत को डिलीवर कर दी जाएंगी। नाटो (हृ्रञ्जह्र) स्टैंडर्ड के अनुसार बनी होने के कारण यह गन बेहद टिकाऊ और किसी भी कठिन परिस्थिति में काम करने में सक्षम है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मशीन गन को कंप्यूटरीकृत हथियार सिस्टम के साथ भी आसानी से जोड़ा जा सकता है, जो युद्ध के मैदान में दुश्मनों पर 100 प्रतिशत सटीक निशाना लगाने में सेना की मदद करेगा।
जल्द मिलेंगी 1.70 लाख कार्बाइन
भारत और इजरायल के बीच रक्षा क्षेत्र में यह सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। लाइट मशीन गन के अलावा, अडानी ग्रुप और इजरायली कंपनी के जॉइंट वेंचर पीएलआर सिस्टम्स ने 1.70 लाख क्लोज क्वार्टर बैटल (ष्टक्तक्च) कार्बाइन सप्लाई करने का भी एक अहम कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। इस बड़ी डील के तहत पहली 18 हजार यूनिट्स की डिलीवरी भी इसी साल पूरी कर ली जाएगी। दुश्मनों की हर नापाक साजिश को नाकाम करने और भारतीय सेना को दुनिया के सबसे आधुनिक छोटे हथियारों से लैस करने की दिशा में यह एक गेम चेंजर कदम साबित होने वाला है।

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