सोशल मीडिया के दौर में पत्रकार कर रहे चुनौतियों का मुकाबला

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नई टिहरी। राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता की सुरक्षा को लेकर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें पत्रकारों ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में वास्तविक रूप से पत्रकारिता कर रहे लोगों को कठिन चुनौतियां उठानी पड़ रही है। ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय,प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट सूचना विभाग को कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। रविवार को सूचना विभाग सभागार में आयोजित संगोष्ठी में अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी भजनी भंडारी, प्रेस क्लब अध्यक्ष शशिभूषण भट्ट,पूर्व अध्यक्ष गोविंद बिष्ट, गंगादत्त थपलियाल,गोविंद पुंडीर,पूर्व महामंत्री मुकेश रतूड़ी, तेजराज सेमवाल ने कहा कि अधिवक्ताओं की भांति पत्रकारों के लिए भी जिला,स्टेट और राष्ट्रीय स्तर पर ऑथॉरिटी बने। शैक्षिक योग्यता का प्रावधान हो,आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निरस्त हों। धरातल पर कार्य करने वाले पत्रकारों की समस्याएं हल हों। उनकी मान्यता के प्रकरणों को शिथिलीकरण प्रदान करते हुए ब्लॉक और तहसील स्तर पर मान्यता मिले। बगैर पंजीकरण के संचालित पोर्टल,यू-ट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध हो। आरएनआई के पंजीकरण के बिना कोई चैनल/पोर्टल आईडी न चलाए। भ्रामक सूचना के लिए फिल्टर सिस्टम हो। मीडिया घरानों और पत्रकारों को इसके लिए आगे आना होगा। इस मौके पर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष जयप्रकाश पांडेय, प्रदीप डबराल, विजय गुसाईं, विजय दास, धनपाल गुनसोला, सूर्य रमोला, मनमोहन रावत,सुरेंद्र भट्ट, विजयपाल राणा,ज्योति डोभाल,धीरेश सकलानी,नीलम नेगी आदि मौजूद थे।

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