विकासनगर(। जौनसार बावर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर गुरुवार रात साढ़े आठ बजे से 15 घंटे तक यातायात ठप रहा। भारी बारिश के कारण गुरुवार रात से ही जजरेड़ भू स्खलन जोन में मलबा और बोल्डर आने शुरू हो गया था। आधा घंटे बाद ही मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया। यातायात ठप होने से जौनसार के दो सौ गांवों के किसान परेशान रहे। शुक्रवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे मार्ग पर यातायात बहाल होने के बाद किसान अपनी नगदी फसलें लेकर मंडी को रवाना हुए। इसके साथ ही क्षेत्र के आठ अन्य ग्रामीण मार्गों पर भी यातायात ठप रहा। गुरुवार शाम सात बजे से बारिश शुरू होते ही जजरेड़ भूस्खलन जोन में मलबा गिरना शुरू हो गया था। हालांकि साढ़े आठ बजे तक यातायात रुक रुक चलता रहा, लेकिन रात साढ़े आठ बजे यातायात पूरी तरह बंद हो गया। भारी बारिश के कारण रात में मार्ग से मलबा हटाना संभव नहीं हो पाया। मुख्य मार्ग पर यातायात ठप होने के कारण सुबह चार बजे से ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई थी। कई गांवों से किसान अपनी नगदी फसलों को लेकर मंडी जा रहे थे। समय पर मार्ग नहीं खुलने के कारण कई काश्तकार आधे रास्ते से ही वापस लौट गए। सुबह विकासनगर से चकराता की और चकराता से विकासनगर की ओर जाने वाले वाहनों के पहिए भी थम गए। हालांकि मार्ग पर अधिक मलबा होने के चलते अधिकांश गाड़ी चालकों ने वाया नागथात होकर जाना उचित समझा। लेकिन, उसमें लोगों को अतिरिक्त सफर के साथ अधिक नुकसान भी झेलना पड़ा। सुबह भी लगातार बारिश जारी रहने के कारण मलबा हटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 11 बजे बारिश थमने के बाद जेसीबी से मलबा और बोल्डर हटाए गए, जिससे 11.30 बजे यातायात बहाल हुआ। मार्ग पर फंसे काश्तकार इंदर सिंह, आनंद सिंह, रघुवीर चौहान, भूपाल सिंह ने बताया कि जजरेड़ में मलबे से निजात दिलाने के नाम पर लोनिवि करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है। लेकिन, स्थिति जस की तस है।