केवल प्रवासी श्रमिकों पर दर्ज मुकदमे ही होंगे वापस, लाकडाउन के दौरान महामारी एक्ट में हुए थे दर्ज

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देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना के कारण लागू लाकडाउन के दौरान महामारी एक्ट के तहत दर्ज केवल वही मुकदमें वापस होंगे, जो घरों को लौट रहे श्रमिकों पर दर्ज किए गए हैं। श्रमिकों के अलावा स्थानीय निवासियों व अन्य पर इस एक्ट में दर्ज मुकदमों के संबंध में अभी इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
श्रमिकों पर से मुकदमे वापस लेने का निर्णय भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया है। अभी तक छह जिलों में दर्ज 75 मुकदमें वापस लिए जा चुके हैं। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में मुकदमे वापसी पर रोक के संबंध में कोई आदेश प्रदेश सरकार को अभी प्राप्त नहीं हुआ है। बीते वर्ष मार्च में कोरोना के कारण देश भर में लाकडाउन लगाया गया था। इससे सभी गतिविधियां लगभग ठप हो गई थी। कामकाज पूरी तरह से बंद हो जाने के कारण देश के विभिन्न स्थानों से श्रमिक अपने घरों को पैदल ही लौटने लगे थे।
लाकडाउन के दौरान उत्तराखंड में भी विभिन्न निर्माण कार्य व औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं, जिनमें हजारों प्रवासी श्रमिक कार्यरत थे। रोजी-रोटी पर संकट और कोरोना के खतरे को देखते हुए यहां से भी श्रमिकों ने अपने मूल राज्यों की राह पकड़ी। रास्ते में जहां भी ये लोग पकड़े गए, इन पर महामारी एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किए गए। कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन मुकदमों का स्वतरू संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार से सभी राज्यों में ऐसे मुकदमों को वापस लेने के निर्देश दिए थे। केंद्र सरकार के निर्देशों के क्रम में प्रदेश सरकार ने भी सभी जिलों को पत्र लिखकर ऐसे मुकदमों की वापसी के निर्देश दिए।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में इन मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। धीरे-धीरे शासन स्तर पर इसकी सूचना भी पहुंच रही है। अभी तक ऊधमसिंहनगर, टिहरी व पौड़ी में दर्ज 65 मुकदमें वापस लिए जा चुके हैं। शेष जिलों में भी यह प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में सचिव गृह नितेश झा का कहना है कि केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में केवल प्रवासी श्रमिकों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र द्वारा मुकदमे वापसी पर रोक के संबंध में कोई प्रस्ताव राज्य को प्राप्त नहीं हुआ है।

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