जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : एक समय दुगड्डा ब्लॉक के भट्ट गांव व जयगांव में बेहतर खेती होती थी। जिसके बाद वन विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर फसल बचाने और जंगली जानवरों से निजात के लिए गांव के आसपास फेंसिंग लाइन लगाई। लेकिन, वर्तमान में यह फेंसिंग लाइन जगह-जगह टूट चुकी है। बावजूद इसकी मरम्मत पर ध्यान देना वाला कोई नहीं है। नतीजा, आज भी जंगली जानवर गांव में घुसकर काश्तकारों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। ग्रामीणों को गांव से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
भट्ट गांव व जयगांव की बेहतर खेती एक पहचान थी। लेकिन, धीरे-धीरे आसपास के जंगल से जंगली जानवर गांव में पहुंचकर काश्तकारों की खेती को नुकसान पहुंचाने लगे। ग्रामीणों की शिकायत के बाद सरकारी सिस्टम ने वर्ष 2019 में करीब 65 लाख रुपये की लागत से साढ़े छह किलोमीटर के क्षेत्र में फेंसिंग लाइन बिछाने का कार्य किया। लेकिन, कुछ वर्ष बाद ही फेंसिंग लाइन ने जवाब देने शुरू कर दिया था। ग्रामीण मुकेश भट्ट ने बताया कि वर्तमान में फेंसिंग लाइन कई स्थानों पर टूट चुकी है। स्थिति के बारे में कई बार वन विभाग को अवगत करवा चुके हैं। लेकिन, आज तक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके पर झांकने तक नहीं पहुंचा। जबकि, होना तो यह चाहिए था कि समय-समय पर फेंसिंग लाइन का निरीक्षण कर इसकी देखरेख की जाती।
पलायन को मजबूर ग्रामीण
भट्ट गांव व जयगांव के ग्रामीणों की आर्थिकी खेती पर ही टिकी हुई थी। लेकिन, जंगली जानवर आए दिन उनकी खेती को नुकसान पहुंचा देते हैं। नतीजा, मेहनत के बाद भी फल नहीं मिलने से परेशान ग्रामीणों ने खेती से मुंह मोड़ लिया है। ऐसे में वह रोजगार के लिए गांव से पलायन को भी मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में बीस से अधिक परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से फेसिंग लाइन की मरम्मत करवाकर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की मांग की है।