देव भूमि को बचाने के लिए जरूरी है भू-कानून व मूल निवास

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उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से आयोजित की गई गोष्ठी
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : उत्तराखंड क्रांति दल ने प्रदेश के बेहतर विकास के लिए धरातल पर संघर्ष करने का निर्णय लिया है। कहा कि देव भूमि को बचाने के लिए भू-कानून व मूल निवास जरूरी है। इस दौरान दल के वरिष्ठ नेता डा. शक्तिशैल कपरवाण ने अपने पचास वर्ष का अनुभव भी सांझा किया। कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के बेहतर विकास का है।
तडियाल चौक स्थित एक मॉल में बैठक का आयोजन किया गया। गोष्ठी को संबोधित करते हुए उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के बेहतर विकास के लिए उत्तराखंड राज्य का गठन किया गया था। लेकिन, सत्ता में पहुंची केंद्रीय पार्टियों ने केवल अपने निजी स्वार्थ के लिए कार्य किया। आज भी प्रदेश की जनता मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पहाड़ों से लगातार पलायन हो रहा है। कहा कि जिन मुद्दों पर राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी। उन मुद्दों को राष्ट्रीय दलों की सरकारों ने हासिए पर डाल दिया है। मूल निवास प्रमाण पत्र की बाध्यता को हटाकर स्थाई निवास प्रमाण पत्र लागू करवा दिया। जिससे प्रदेश के मूल निवासी सरकारी नौकरियों से बाहर हो गए। भू-कानूनों में लचीलापन अपनाया जा रहा है। जिससे प्रदेश के अधिकांश भूमि पर बाहरी प्रदेशों के भू-माफियाओं का कब्जा हो गया है। दल के नेता डा. शक्तिशैल कपरवाण ने कहा कि उन्होंने जीवन के पचास साल उत्तराखंड राज्य के निर्माण के समर्पित किए है। राज्य तो बन गया लेकिन अब उसे बचाने की सख्त जरूरत है। इसके लिए वह लगातार धरातल पर संघर्ष करेंगे। कहा कि उत्तराखंड राज्य बन जाने के बाद राज्य से लगभग 17 लाख लोग पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन कर गए हैं। संगोष्ठी में नागेंद्र उनियाल, सुभाष नौटियाल, सत्य प्रकाश भारद्वाज, प्रमोद काला ने भी अपने विचार रखे। इस मौके पर महेंद्र सिंह रावत, जगदीपक रावत, प्रवेश नवानी, गोंविद डंडरियाल, कुंवर प्रताप सिंह मौजूद रहे।

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