योग के जरिए आंतरिक संतुलन बनाना सीखा

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ऋषिकेश। योग, साधना और हवन-यज्ञ से परमार्थ निकेतन आश्रम दमक उठा। इसके साथ ही सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन 15 सौ से अधिक साधकों ने योगाभ्यास किया और हवन-यज्ञ में आहुतियां भी डालीं। शाम को स्वामी चिदानंद और साध्वी डॉ. भगवती सरस्वती के सानिध्य में गंगा आरती में भी भाग लिया। योग महोत्सव के अंतिम दिन प्रातःकालीन साधनाओं में हिमालय पर उगते सूर्य के साथ प्रतिभागियों ने प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक सुधांशु शर्मा के साथ सूर्योदय मंत्रोच्चार में भाग लिया, जिससे वातावरण भक्ति और ऊर्जा से भर गया। इसके पश्चात योग सत्र में योगाचार्यों ने योगाभ्यास कराया। दोपहर में डॉ. योगऋषि विश्वकेतु ने प्राणायाम, एचएस अरुण ने साधना, दासा दास ने विन्यास योग फ्लो, डॉ. संजय मंचंदा ने प्राचीन ध्यान, गंगा नन्दिनी ने गंगा योग, जय हरि सिंह ने निर्विकल्प प्रेम, आध्या ने योग निद्रा, गायत्री योगाचार्या ने साधना आदि का अभ्यास कराया और इनकी महत्ता भी बताई। आयुर्वेदाचार्य डॉ. कृष्ण पंकज नरम ने ऋतु के अनुसार रोगों से बचाव के प्राचीन ज्ञान को साझा किया। गुरनिमित सिंह ने कंठ चक्र साधना सिखाई। एलिमेंटल डांस और सेक्रेड साउंड्स के माध्यम से आनंदमय उत्सव हुआ, जिसने गंगा तट पर अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 को एक दिव्य और प्रेरणादायी समापन प्रदान किया। वहीं, परमार्थ निकेतन के गंगा घाट पर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा के समक्ष विभिन्न देशों से आए राजदूत, उच्चायुक्त, राजनायिक, योग साधक और योगाचार्यों ने योगाचार्य गंगा नन्दिनी के नेतृत्व व मार्गदर्शन में एक साथ योग का अभ्यास किया।
साधकों ने यज्ञ में डाली आहुतियां: विश्व भर से आए योग साधकों ने परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिन गंगा तट पर हवन यज्ञ किया। सभी ने सामूहिक रूप से विश्व शांति यज्ञ में आहुतियां डालीं। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक चेतना है। वह चेतना जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” और सर्वें भवन्तु सुखिनः का संदेश देती है। यहां योग मन, आत्मा और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने का सेतु है। डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि प्रेम हमारे जीवन के अनुभव को हमारे शरीर, मन और हमारे संबंधों को बदल देता है।

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