विकासनगर(। गो संरक्षण सेवा समिति साहिया के तत्वावधान में आयोजित द्विवार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने गाय की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, गाय विश्व का ऐसा प्राणी है जो सभी के लिए वात्सल्य के समान है। उन्होंने कहा है कि गायों को सड़कों पर लावारिस छोड़ना सबसे बड़ा महापाप है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह मां के समान दूध देती है, गोबर से खाद बनाती है। गोमूत्र से औषधि प्रदान करती है। गो संरक्षण हमारा धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कर्तव्य है। उन्होंने गो संरक्षण के महत्व पर विस्तार से चर्चा कर बताया कि गाय भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्राचीन ग्रंथों में गाय को गो माता कहा गया है, जो अन्न, जल और स्वास्थ्य का स्रोत है। आज प्रदूषण और प्लास्टिक के दौर में गो संरक्षण से जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने समिति के कार्यों की सराहना की। कहा कि साहिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में गोशालाओं का विस्तार आवश्यक है। गाय की रक्षा से मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और जल संकट कम होगा। कार्यक्रम में गोशाला विकास, गोवंश संरक्षण योजनाओं और जैविक खेती पर चर्चा हुई। अध्यक्ष राकेश चौहान ने बताया कि समिति ने अब तक सैकड़ों गायों को संरक्षण दिया है। इस मौके पर आचार्य बालकृष्ण ने गो भक्तों को सम्मानित भी किया। समापन में सभी ने गो माता के जयकारे लगाए। यह सम्मेलन उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में गो संरक्षण को नई दिशा देगा। सम्मेलन में डॉ. रवि कान्ता शर्मा, जगत राम जोशी, अध्यक्ष राकेश चौहान, मोहन लाल शर्मा, सतपाल राय, मुकेश तोमर, सरदार सिंह चौहान, टीकम सिंह बिष्ट, अर्जुन सिंह चौहान, अमर सिंह चौहान, प्रवीण चौहान, विनोद कुमार भसीन, रविंद्र सिंह, राजेश जैन, केशर सिंह तोमर, सुरेंद्र सिंह चौहान, यशपाल सिंह तोमर, कृपाल सिंह चौहान मौजूद रहे।