सीता स्वयंवर में टूटा श्रीराम के हाथों भगवान शिव का धनुष

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मालवीय उद्यान में आयोजित रामलीला का चौथा दिन
जयंत प्रतिनिधि।
कोटद्वार। श्री बाल रामलीला कमेटी की ओर से मालवीय उद्यान में आयोजित रामलीला के चौथे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। इस दौरान रामलीला पंडाल जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा।
मालवीय उद्यान में आयोजित रामलीला मंचन के चौथे दिन का शुभारंभ विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष दीपक गौड़ और जिला मंत्री जितेंद्र बेबनी ने दीप प्रज्वलित कर किया। रामलीला में भगवान राम जनकपुरी जाते समय पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार करते हैं, इसके उपरांत जनकपुरी में पुष्प वाटिका के सुंदर दृश्य दिखाए जाते हैं। माता सीता श्रीराम को वर के रूप में पाने के लिए मां दुर्गा की स्तुति करती है। इसके बाद स्वयंवर की तैयारियां होती है। स्वंयवर में पहुंचा रावण जैसे ही धनुष तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है तभी आकाशवाणी होने लगती है, जिसके बाद रावण को स्वयंवर से वापस जाना पड़ता है। इसके बाद मुनि विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम शिव धनुष तोड़ देते हैं और फिर सीता माता राम के गले में वरमाला डाल देती है। उधर शिव धनुष तोड़े जाने से परशुराम क्रोधित हो जाते हैं। अंत में श्रीराम को पहचान कर परशुराम उनसे माफी मांगते हैं। परशुराम लक्ष्मण के संवाद का भी कलाकारों द्वारा बेहद सुंदर मंचन किया गया। जय श्री राम के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। राम सीता विवाह के दौरान पटाखे फोड़कर खुशियां मनाई गई।

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