मेले में एक तीर्थयात्री की मौत,अब तक पांच बीमार श्रद्धालु किए गए एयर लिफ्ट
सागरद्वीप , मकर संक्रांति के पुण्यकाल में गंगा व सागर के संगम में अब तक 85 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने मोक्ष की डूबकी लगाई। आज राज्य के मंत्री अरुप विस्वास ने उक्त दावा किया और कहा कि, अभी भी व्यापक संख्या में तीर्थयात्री पुण्य स्नान करेंगे। आज शाम संवाददाता सम्मेलन में राज्य के मंत्री अरुप विस्वास ने एक बार फिर ममता सरकार की व्यवस्था को उत्तम के साथ ही चाक चौबंद बताते हुए दावा किया कि, अब गंगासागर की यात्रा सुगम हो गई है। लेकिन स्थानीय लोगों व दुकानदारों ने नाम की गोपनियता पर उक्त दावें पर संदेह व्यक्त किया। मेले में आज असम निवासी एक पुण्यार्थी मिठू मंडल (51) की मौत हो गई है। जबकि अबतक 5 तीर्थयात्री जो गंभीर तौर पर बीमार हुए थे को एयर लिफ्ट कर इलाज के लिए कोलकाता भेजा गया। आज दो बीमार पुण्यार्थी बिहार के दरभंगा जिले की निवासी व बिहार के पूर्वी चम्पारण की निवासी पुण्यार्थी प्रेमाकांति देवी (72) को एयर लिफ्ट कर इलाज के लिए कोलकाता भेजा गया। 14 जनवरी के दोपहर से ही तीर्थयात्री पुण्यस्नान के लिए सागर तट पर जमा हुए। आज तड़के से ही सारा दिन पुण्यार्थी पुण्य स्नान करते नजर आये। सरकारी तौर पर मकर संक्रांति का पुण्यकाल आज दोपहर 1.19 बजे से कथित तौर पर शुरु हुआ जो कि 15 जनवरी दोपहर 1.19 बजे तक है।
पुण्य स्नान के बाद पुण्यार्थियों ने लम्बी कतार में खड़े होकर श्री हरि अवतार कपिलमुनि का दर्शन करते रहें और फिर अपने घरों की ओर जाने के लिये उतावले दिखें। भारी संख्या में पुण्यार्थियों का जत्था बस स्टैंड की रवाना होता रहा जिसके कारण व्यापक जाम देखा गया। व्यवस्था का अभाव कोहरे के कारण वह लोग परेशान रहें। आज भी तीर्थयात्रियों ने आरोप लगाया कि, उनलोगों को एक-एक जगह 6 से 8 घंटे तक खड़े रहना पड़ा है। हालात तो यह रहे कि कोहरे के कारण बस व वेसेल सेवा पर असर पड़ा। उक्त संवाददाता सम्मेलन में आज मंत्री अरूप विश्वास, मंत्री सुजीत बोस, मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती व मंत्री बंकिम हाजरा, बेचाराम मन्ना सहित कई मंत्री जिला सभाधिपति नीलिमा मिस्त्री बिशाल व डीएम एके मीणा मौजूद थें। बहरहाल तीर्थयात्री मकर संक्रांति का पुण्य स्नान के बाद हर-हर गंगे व जय कपिल मुनि के उद्घोष करते रहें । इधर सुंदरबन पुलिस जिला के अधिकारी ने व सरकारी सूत्रों ने बताया, कि, अब तक यहां पाकेटमारी की 272 घटनाएं हुई हैं, लेकिन 260 मामलों में पुलिस खोई हुई वस्तुओं को बरामद करने में सफल रही है। इसके अलावा, अब तक विभिन्न आपराधिक मामलों 672 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, पुलिस ने अब तक मेले में लापता हुए लगभग 1 हजार लोगों में से ज्यादातर को ढूंढ निकाला है। उन्हें उनके परिवारों के पास भी पहुंचा दिया गया है। मेले में ‘ई-परिचय’ नामक एक क्यूआर कोड भी प्रदान किया गया है। इससे किसी बुजुर्ग व्यक्ति या बच्चे के खो जाने पर उसे ढूंढने में मदद मिलेगी। तीर्थयात्री ‘ई-अनुसंधान’ पर एक विशेष क्यूआर कोड के माध्यम से मेले से संबंधित कोई भी जानकारी अपनी उंगलियों पर प्राप्त कर सकेंगे। ‘बंधन’ के तहत फोटो बूथ की सुविधा भी है। वहां से तीर्थयात्रियों को नि:शुल्क फोटो सहित प्रमाण पत्र प्राप्त होगा। जबकि, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए 15,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। मेले में दिन-रात सुरक्षा के लिए निगरानी टावर, अपराध-दमन गश्ती दल, पैदल गश्ती दल, गुमशुदा व्यक्ति दस्ते, खोजी कुत्ते, नदी गश्ती दल और समन्वय दल मेले में तैनात है। मेले में पेयजल से लेकर शौचालय की भी उत्तम व्यवस्था का दावा किया गया है। गंगा सागर मेला 2026 सागर द्वीप में 7 जनवरी से शुरू हुआ। मेले का समापन 17 जनवरी को होगा। मेले में 2500 सिविल डिफेंस कर्मी तैनात हैं।2500 से अधिक बसें व अन्य वाहन तीर्थयात्रियों के लिए चल रही है। साथ ही 1000 से 2500 यात्री क्षमता वाले 13 बर्ज की सेवा भी है। कुछ तीर्थ यात्रियों की माने तो कचुबेरिया से लॉट संख्या आठ तक सेवा प्रभावित रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने के कारण राज्य सरकार ने सागर द्वीप पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए राज्य पुलिस के अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और तटरक्षक बल के जवान तैनात हैं और वहां आवश्यक उपकरण भी रखे गए हैं।
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