मासूमों के परिजनों को प्रशासन ने की चार-चार लाख की संस्तुति

Spread the love

जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। गत रविवार को खोह नदी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। स्थानीय प्रशासन ने जिला प्रशासन से मासूम बच्चों के परिजनों को चार-चार
लाख रूपये मुआवजा देने की संस्तुति की है। एसडीएम ने कहा कि नदी किनारे रहने वाले लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। इसके लिए जागरूकता
अभियान चलाया जायेगा। लोगों से कहा जायेगा कि बरसात के समय बच्चों को नदी क्षेत्र में नहीं जाने देना है और स्वयं भी नहीं जाना है। इस बात का विशेष
ध्यान रखें।
ज्ञात हो कि कुष्ठ आश्रम काशीरामपुर तल्ला निवासी 6 वर्षीय अरसद पुत्र फुरकान, 7 वर्षीय गुलशेर पुत्र एहसान गत रविवार दोपहर खाना खाने के बाद घर के
पास खेल रहे थे। दोनों जब काफी देर तक घर नहीं आये तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। काफी खोजबीन करने के बाद भी दोनों ने नहीं मिले। बच्चों को ढूढ़ते
हुए परिजन खोह नदी में पहुंचे, लेकिन काफी देर तक खोजबीन करने पर भी वह नहीं मिले। इसी दौरान नदी में नहा रहे लोगों ने बताया था कि बच्चे गड्ढ़े में फंसे
हुए है। फुरकान के पड़ोसी रवि ने गड्ढे में छलांग लगाकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला था। परिजन दोनों को राजकीय बेस अस्पताल लेकर आये, जहां डॉक्टरों ने
दोनों को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर एसएसआई प्रदीप नेगी, बाजार पुलिस चौकी प्रभारी कमलेश शर्मा, उपनिरीक्षक सतेन्द्र भंडारी, महिला उपनिरीक्षक पूनम
शाह, भावना भट्ट पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे थे पुलिस ने शव को कब्जे में लिया था। पुलिस ने अरसद और गुलशेर के शव का पंचायतनामा भरकर तथा
पोस्टमार्टम कराने के बाद शवों को परिजनों को सौंप दिया था।
उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा ने बताया कि बरसात में नदी क्षेत्र में जाने के लिए सभी को मना किया गया है। इसके लिए लाउडस्पीकर से प्रचार-प्रसार भी
किया गया है। इसके बावजूद भी गत रविवार को दो बच्चे खोह नदी में चले गये और जल स्तर बढ़ने से दो बच्चों की डूबने से मौत हो गई। दैवीय आपदा मानक
के अनुसार मुआवजा देने के लिए संस्तुत किया गया है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की गई है। दैवीय आपदा के तहत नदी में बहने या डूबने से हुई मौत
में परिजनों को चार लाख रूपये मुआवजा देने का प्रावधान है। एसडीएम ने कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो नदी किनारे रहने वाले लोगों को जागरूक रहने
की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुलिस और सिंचाई विभाग को निर्देशित किया गया है कि बरसात के समय नदी क्षेत्र में यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक रूप से
घूम रहे है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाय। इसके अलावा बड़े पुलों पर नोटिस लगाने को कहा गया कि बरसात के समय नदी क्षेत्र में जाने पर काईवाई की
जायेगी। इसका लगातार प्रचार-प्रसार किया जाय।

बॉक्स समाचार
कोटद्वार में रीवर टे्रनिंग से बने तालाब में डूबे मासूमों की मौत की मजिस्ट्रीयल जांच की मांग
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। कोटद्वार की खोह नदी में रीवर टे्रनिंग से बने तालाब में डूबने से हुई दो बच्चों की मौत की मजिस्ट्रीयल जांच कराने की मांग जिला प्रशासन से की है। इस
संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रेषित किया गया है। लोगों ने खोह नदी में नियमों के विपरीत हो रहे चैनलाइजेशन को बच्चों की मौत का जिम्मेदार ठहराया।
स्थानीय प्रशासन से मानकों के विपरीत हो रहे खनन की शिकायत की थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने एक नहीं सुनी।
नगर निगम के वार्ड नंबर 6 काशीरामपुर तल्ला के पार्षद सूरज प्रसाद कांति ने तहसीलदार विकास अवस्थी के माध्यम से जिलाधिकारी को प्रेषित ज्ञापन में
कहा कि गत रविवार को खोह नदी में डूबने से दो बच्चों की मौत हो गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन को लगातार अवगत कराया जाता रहा कि खोह
नदी में रिवर चैनलाइजेशन के नाम पर लगातार पोकलैण्ड मशीन द्वारा गहरे गड्ढ़े खोदे जा रहे है, लेकिन इस ओर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। बरसात शुरू
होने के बाद भी रिवर चैनलाजेशन का कार्य करवाया जा रहा है। काशीरामपुर तल्ला के पास खोह नदी के मध्य में मशीन से खोदाकर गहरे गड्ढ़े किये जा रहे है
और इन गड्ढों में पानी भर रहा है। पार्षद ने कहा कि जिस समय खोह नदी में दो बच्चे डूबे उस समय नदी का जलस्तर मात्र एक फुट था। जिस स्थान पर बच्चे
डूबे है वहां पर एक दिन पूर्व ही पोकलैण्ड मशीन द्वारा खनन किया गया था। मशीन के द्वारा नदी में 15 से 20 फुट गहरे गड्ढे खोदे दिये गये, बारिश होने पर इन
गड्ढ़ों में पानी भर गया। जिससे अंदाजा नहीं लग पा रहा है कि नदी में गड्ढे भी बने हुए है। बरसात में नदी के तटों पर स्थित आवासीय बस्तियों में बाढ़ आने का
खतरा बना हुआ है। वहीं खेतों के भी बहने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की मजिस्टे्रट जांच की जाय। जांच में दोषी पाये जाने पर आरोपियों
के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

बॉक्स समाचार
कांग्रेस ने की सुरक्षा दीवार बनाने की मांग
जिला कांग्रेस कमेटी कोटद्वार के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि कोटद्वार की खोह, सुखरो नदी व ग्वालगड, सिगड्डी स्रोत गदेरे में माननीय उच्च
न्यायालय उत्तराखण्ड के दिशा-निर्देशों के विपरीत मशीनों से अनियमित खनन किया जा रहा है। अनियमित खनन से जानमाल का नुकसान हो रहा है। गत रविवार
को खोह नदी में चैनलाइजेशन के दौरान मशीनों से किये गये गड्ढ़े में दो मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। कांग्रेस कमेटी कोटद्वार के जिलाध्यक्ष डॉ.
चन्द्रमोहन खरक्वाल ने कहा कि कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में नदी और नालों में पोकलैण्ड मशीनों से गहरे-गहरे गड्ढ़े कर दिए गए है। जिससे सुरक्षा दीवारों को
खतरा बना हुआ है। वहीं एक मात्र शशिधर भट्ट राजकीय स्पोर्टस स्टेडियम की सुरक्षा दीवार को खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर
अनियमित एवं पोकलैण्ड मशीनों से किए जा रहे खनन पर रोक लगाने, नदी तटों पर पूर्व में बनाई गई सुरक्षा दीवारों की मरम्मत, खतरे वाले स्थान पर सुरक्षा
दीवार का निर्माण कराने, स्टेडियम की सुरक्षा दीवार की मरम्मत कराने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देशित करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में संजय मित्तल
महानगर अध्यक्ष, विजय रावत यूथ कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष, बलवीर सिंह रावत, हेमचन्द्र पंवार, जितेन्द्र भाटिया आदि शामिल थे।

बॉक्स समाचार
मासूम बच्चों की मौत के लिए खननकारी जिम्मेदार
भारतीय राष्ट्रीय महिला कांग्रेस कोटद्वार जिलाध्यक्ष श्रीमती रंजना रावत ने खोह नदी काशीरामपुर तल्ला में दो बच्चों के नदी में डूब जाने पर गहरा दु:ख जताया।
उन्होंने घटना के लिए खनन माफियाओं के कारनामों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने प्र्रदेश सरकार से पीड़ित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये देने की मांग भी की
है। साथ ही कोटद्वार भाबर की सभी नदियों व नालों किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की मांग प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक एवं वन मंत्री डॉ. हरक सिंह
रावत से की है। रंजना रावत ने कहा कि प्रशासन को कोटद्वार-भाबर की नदियों के किनारे की बस्ती के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने नदी में डूबने से दो बच्चों की मौत के लिए प्रशासन को भी दोषी ठहराते हुए कहा कि कोरोना महामारी के बचाव के लिए प्रशासन मास्क व शारीरिक दूरी के
नियमों के पालन के लिए सभी को जागरूक कर रहा है। प्रशासन को नदी किनारे की बस्ती के लोगों को अपने बच्चों को घरों में ही सुरक्षित रहने व नदी की ओर
नहीं जाने के लिए भी जागरूक करना चाहिए था। प्रशासन को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत से पीड़ित परिवार बुरी तरीके से टूट
चुके है। ऐसी स्थिति में प्रदेश सरकार को परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये राशि देनी चाहिए।

\

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!