बेंगलुरु, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुलाकात की है। शिवकुमार नाश्ते के लिए मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। उन्होंने कहा कि जो आलाकमान कहेगा, वही करूंगा। आलाकमान के निर्देश पर हो रही इस बैठक में मुख्यमंत्री पद को लेकर हल निकलने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद शिवकुमार सीधे दिल्ली निकल जाएंगे।
दोनों नेताओं ने मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें सिद्धारमैया ने कहा, हमारे बीच अच्छी बात हुई। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। हमारे बीच भविष्य में भी किसी तरह का मतभेद नहीं होगा। हमने मतभेद दूर करने के लिए मुलाकात की। हम विपक्ष का मजबूती से सामना करेंगे। हमने 2028 की चुनावी मुकाबले को लेकर बातचीत की। वहीं, शिवकुमार ने कहा कि नाश्ता अच्छा था और हमने किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं की।
सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि बैठक में कुछ हद तक कई मुद्दों पर गतिरोध रहा। अखबार ने बताया कि सिद्धारमैया ने शिवकुमार से 2028 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद संभालने का आग्रह किया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेता बैठक के दौरान अपने-अपने रुख पर अड़े रहे। मुलाकात के बाद सिद्धारमैया ने लिखा, मैंने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ नाश्ता किया और थोड़ी बातचीत की।
कल सिद्धारमैया ने कहा था, पार्टी आलाकमान ने मुझे और शिवकुमार को बुलाया था। हमें आपस में बातचीत करने को कहा है। बदलाव पर आलाकमान जो कहेगा, मैं मानूंगा। हम दोनों ने पहले भी कहा है कि पार्टी का जो फैसला होगा, हम उसका पालन करेंगे। अगर आलाकमान बुलाएगा तो दिल्ली भी जाएंगे। वहीं, शिवकुमार ने कहा था, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं किसी जल्दी में नहीं हूं। फैसला मेरी पार्टी करेगी।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा, आज सुबह कावेरी रेसिडेंस पर माननीय मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया से नाश्ते के दौरान मुलाकात की। कर्नाटक की प्राथमिकताओं और आगे के रास्ते पर अच्छी चर्चा हुई।
कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने कहा, कोई शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है तो कोई सिद्धारमैया को बनाए रखना चाहता है और कोई मुझे बनाना चाहता है। आप लोगों की उम्मीदों को रोक नहीं सकते। हर बार जब मुख्यमंत्री के बारे में बात होती है, चाहे चुनाव के बाद हो या बीच में लोग अपनी उम्मीदें जाहिर करते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इन सभी मुद्दों पर आलाकमान की नजर जरूर होती है। वे इसे सुलझा लेंगे।
कहा जाता है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच आलाकमान ने ढाई-ढाई साल का फार्मूला तय किया था। कथित तौर पर शिवकुमार से वादा किया गया था कि ढाई साल बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। 20 नवंबर को सरकार को ढाई साल हो गए हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। इससे पहले भी कई बार शिवकुमार समर्थक ऐसी मांग करते रहे हैं।