नई टिहरी : सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ने सोमवार को चार श्रम संहिताओं के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया है। सीटू ने इन श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही, ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के प्रति गहरा रोष भी व्यक्त किया गया है। जनपद टिहरी गढ़वाल में श्रम प्रवर्तन अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में सीटू पदाधिकारियों ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताएं पूरी तरह श्रमिक विरोधी हैं। इन कानूनों को संसद में विपक्षी सांसदों के निष्कासन के दौरान एकतरफा तरीके से पारित किया गया, जिसमें ट्रेड यूनियनों की भूमिका और सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। सीटू नेताओं ने बताया कि ट्रेड यूनियनें शुरू से ही इन श्रम संहिताओं का विरोध करती आ रही हैं। उनका कहना है कि नए श्रम कानूनों से श्रमिकों का उत्पीड़न बढ़ेगा। इनमें न्यूनतम वेतन निर्धारण का कोई स्पष्ट और ठोस आधार नहीं है। यूनियन ने मांग की कि देशभर में न्यूनतम वेतन कम से कम 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि नई श्रम संहिताओं के तहत श्रमिकों से 12 घंटे तक कार्य कराना संभव हो जाएगा, जो श्रमिकों के हितों के खिलाफ है। (एजेंसी)