मां ने किडनी देकर बचाई बेटी की जान, ब्लड ग्रुप भी अलग था

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देहरादून(। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने पहला एबीओ इनकम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट किया है। अत्याधुनिक तकनीक से अब अलग-अलग ब्लड ग्रुप होने के बावजूद किडनी ट्रांसप्लांट संभव हो सकेगा। जिससे डोनर की कमी से जूझ रहे मरीजों को नई उम्मीद मिली है। यह उपलब्धि 24 वर्षीय छात्रा अदिति के इलाज के दौरान हासिल हुई, जो पिछले दो वर्षों से एंड स्टेज रीनल डिजीज से पीड़ित थीं और डायलिसिस पर थीं। ब्लड ग्रुप मेल न खाने के कारण परिवार को डोनर मिलने में दिक्कत आ रही थी। ऐसे में नई तकनीक के जरिए उनकी 52 वर्षीय मां, सुनीता का ब्लड ग्रुप अलग होने के बावजूद, अपनी बेटी को किडनी डोनेट कर उसे नया जीवनदान दिया। अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर (नेफ्रोलॉजी) डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि भारत में चुनिंदा केंद्रों पर ही यह सुविधा उपलब्ध है। अब देहरादून में यह क्षमता होने से मरीजों को ब्लड ग्रुप मैच न होने पर निराश नहीं होना पड़ेगा। इस जटिल सर्जरी को डॉ. अरोड़ा के नेतृत्व में डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. दीपक गर्ग और डॉ. तारिक नसीम की टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी के बाद डोनर और मरीज दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

 

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