बीजिंग , मानव जाति के अंतरिक्ष में बसने और दूसरी दुनिया में घर बनाने के सपने को एक नई उड़ान मिली है। चीन के अंतरिक्ष स्टेशन ‘तियानगोंगÓ से पृथ्वी पर लौटी एक चूहिया ने 9 स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। यह घटना विज्ञान जगत में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रयोग साबित करता है कि छोटी अवधि की अंतरिक्ष यात्रा का स्तनधारी जीवों (मैमल्स) की प्रजनन क्षमता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। यह ऐतिहासिक प्रयोग चीन के शेनझोउ-21 मिशन का हिस्सा था, जिसने भविष्य में मंगल और चंद्रमा पर इंसानी बस्तियां बसाने की संभावनाओं को प्रबल कर दिया है।
इस अनूठे प्रयोग की शुरुआत 31 अक्टूबर को हुई थी, जब चीन ने शेनझोउ-21 स्पेसक्राफ्ट के जरिए चार चूहों (जिनके कोड नंबर 6, 98, 154 और 186 थे) को पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर स्थित अपने अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजा था। ये चूहे वहां दो हफ्ते तक रहे, जहां उन्होंने माइक्रोग्रैविटी (कम गुरुत्वाकर्षण), खतरनाक स्पेस रेडिएशन और अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 14 नवंबर को सुरक्षित पृथ्वी पर लौटने के बाद, 10 दिसंबर को इनमें से एक मादा चूहिया ने 9 बच्चों को जन्म दिया। हालांकि इनमें से 6 बच्चे ही जीवित बचे, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह जीवित रहने की दर पूरी तरह सामान्य है। मां अपने बच्चों को ठीक से दूध पिला रही है और सभी ‘स्पेस पप्सÓ सक्रिय रूप से बढ़ रहे हैं।
चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की रिसर्चर वांग होंगमेई ने इस सफलता पर उत्साह जताते हुए कहा कि यह नतीजा बताता है कि स्पेस की यात्रा प्रजनन अंगों को खराब नहीं करती। इससे पहले किए गए प्रयोगों में केवल स्पेस से लौटे चूहों के स्पर्म का इस्तेमाल कर पृथ्वी पर अंडे फर्टिलाइज किए गए थे, लेकिन इस बार पूरी मादा चूहिया को अंतरिक्ष भेजा गया था, जिसने लौटने के बाद प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। यह मिशन इतना आसान नहीं था; वापसी में देरी होने के कारण चूहों के लिए खाने की कमी का संकट भी पैदा हो गया था। तब ग्राउंड टीम ने आपात स्थिति में एस्ट्रोनॉट्स के खाने जैसे कंप्रेस्ड बिस्किट और सोया मिल्क का परीक्षण किया, जिसमें सोया मिल्क सबसे सुरक्षित विकल्प साबित हुआ।
वैज्ञानिकों के लिए यह प्रयोग इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चूहों की जेनेटिक संरचना इंसानों से काफी मिलती-जुलती है। अगर अंतरिक्ष यात्रा का प्रजनन पर कोई बुरा असर होता, तो वह इन चूहों में जरूर दिखता। अंतरिक्ष स्टेशन पर चूहों के लिए पृथ्वी जैसा माहौल बनाने के लिए सुबह 7 बजे लाइट ऑन और शाम 7 बजे ऑफ की जाती थी, साथ ही एआई सिस्टम उनकी हर हरकत पर नजर रखता था। अब वैज्ञानिक इन बच्चों के विकास पर नजर रखेंगे कि क्या अगली पीढ़ी में स्पेस रेडिएशन का कोई छिपा हुआ असर दिखाई देता है। यह प्रयोग मंगल या चंद्रमा पर लंबी यात्राओं के दौरान इंसानी प्रजनन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।