नासा को फिर निराशा, चंद्र रकेट का परीक्षण दूसरी बार टालना पड़ा

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केप केनवरल। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। उसके महत्वाकांक्षी नए चंद्र रकेट से शनिवार को उस समय फिर से खतरनाक रिसाव हुआ, जब इसके परीक्षण की अंतिम तैयारियों के लिए इसमें ईंधन भरा जा रहा था। नासा के वैज्ञानिकों ने इस सप्ताह अपनी दूसरी कोशिश के तहत, स्पेस एजेंसी के अब तक के सबसे शक्तिशाली 322 फीट लंबे रकेट में 10 लाख गैलन ईंधन भरना शुरू किया था, लेकिन इसमें रिसाव शुरू होने लगा। जिसके बाद परीक्षम को दूसरी बार टालना पड़ गया है।
इससे पहले सोमवार को की गई कोशिश में इंजन का खराब सेंसर और ईंधन रिसाव के कारण समस्या पैदा हुई थी। नासा के श्लन्च कंट्रोलश् ने बताया कि जैसे ही सूर्योदय हुआ, अति-दबाव का अलार्म बज गया और ईंधन टंकी भरने के अभियान को कुछ समय के लिए रोक दिया गया, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ और फिर से प्रयास किया गया।
बहरहाल, कुछ मिनट बाद, रकेट के निचले हिस्से में इंजन के क्षेत्र से हाइड्रोजन ईंधन का रिसाव होने लगा। इसके बाद नासा ने अभियान रोक दिया और नासा के इंजीनियर ने सील के पास एक टेद को बंद करने की जद्दोजहद की। रकेट के दोपहर में उड़ान भरने के लिए उलटी गिनती शुरू हो गई थी और इसके लिए नासा के पास शनिवार को दो घंटे का समय था।
यदि पुतलों के साथ श्कैप्सूलश् के परीक्षण सफल रहता है, तो अंतरिक्ष यात्री 2024 में चंद्रमा के लिए उड़ान भर सकते हैं और 2025 में उस पर पहुंच सकते हैं। आखिरी बार 50 साल पहले अंतरिक्ष यात्री ने चंद्रमा पर चहलकदमी की थी। यह अंतरिक्षयान 322 फीट या 98 मीटर लंबा है, जो नासा द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे ताकतवर रकेट है और अपोलो कार्यक्रम के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा तक ले जाने वाले सैटर्न-5 से भी शक्तिशाली है।
इससे पहले, सोमवार को अंतिम तैयारियों के दौरान ईंधन के रिसाव और फिर एक इंजन में खामी आने की वजह से इसके निर्धारित परीक्षण को टालना पड़ा था। इस रकेट के परीक्षण को देखने के लिए हजारों लोग समुद्र तट के पास जमा हुए थे। अब जब भी यह प्रक्षेपण होगा, तो यह नासा के 21वीं सदी के चंद्रमा अन्वेषण कार्यक्रम के तहत यह पहली उड़ान होगी। इसका नाम यूनानी पौराणिक मान्यता के अनुसार अपोलो की जुड़वां बहन आर्टेमिस के नाम पर रखा गया है।

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