राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी : सीडीएस

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गढ़वाल विश्वविद्यालय में सीडीएस जनरल अनिल चौहान का प्रेरक संबोधन
जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का भव्य स्वागत हुआ। शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनरल चौहान ने ‘सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर सम्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ सैन्यभूमि भी है। सामरिक सोच को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सामरिक सोच को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता विकसित हो सके।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, विशिष्ट अतिथि शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दीप प्रज्जवलित कर किया। मुख्य अतिथि सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा का वास्तविक स्वरूप तथा उत्तराखंड का संभावित योगदान क्या हो सकता है विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है, जिसकी शुरुआत विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की दूरदर्शी सामरिक सोच वैदिक साहित्य, चाणक्य नीति और धनुर्वेद जैसी परंपराओं से प्रेरित है, किंतु इतिहास के मुगल और ब्रिटिश कालखंडों में यह दृष्टि कमजोर हुई। आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय तत्व बताते हुए उन्होंने आंतरिक एवं बाहरी खतरों, 1971 के उदाहरण, बदलती युद्ध अवधारणाओं तथा तकनीक-प्रधान संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने देश की सीमाओं और परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों को भारत की प्रमुख चुनौतियां बताते हुए सुदृढ़ सरकार, मजबूत सेना और रणनीतिक तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्तराखंड की सामरिक महत्ता को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, सजग रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने अपने स्वागत वक्तव्य में मंचासीन अतिथियों, विधायक, सैन्य अधिकारियों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वीर भूमि उत्तराखंड, आज मुख्य अतिथि जनरल अनिल चौहान के आगमन से गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि इस पावन धरती ने देश को अनेक वीर सपूत दिए हैं।

योग्यता और प्रतिबद्धता ही चयन का आधार
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान पल्लवी उनियाल ने सेना में महिलाओं की भर्ती और उनकी भूमिका को लेकर प्रश्न किया। इस पर जनरल चौहान ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है, उसी प्रकार भारतीय सेना के प्रत्येक क्षेत्र में भी महिलाओं को समान अवसर और जिम्मेदारियां प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि योग्यता और प्रतिबद्धता ही चयन का आधार है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं मनीषा सिंह, शुभम, आशीष कुमार आदि ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य सेवा और कैरियर से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका जनरल चौहान ने विस्तार पूर्वक एवं संतोषजनक उत्तर दिया। इस अवसर पर देवप्रयाग विधानसभा के विधायक विनोद कण्डारी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गुसाईं, प्रो. महेन्द्र प्रताप सिंह बिष्ट, प्रो. मोहन पंवार, प्रो. मंजुला राणा, प्रो. एचबीएस चौहान, ब्रिगेडियर विनोद नेगी, कर्नल गौरव बत्रा, मुख्य नियंता प्रो. दीपक कुमार, प्रो. एनएस पंवार, अनीष उज जमान, प्रो. राकेश डोढ़ी, चौरास परिसर के निदेशक प्रो. राजेन्द्र सिंह नेगी, जन संपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा, सहित शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय को दी 227 पुस्तकें दान
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय को 227 महत्वपूर्ण पुस्तकें दान स्वरूप प्रदान कीं। ये पुस्तकें विभिन्न सामरिक, ऐतिहासिक एवं शोधपरक विषयों से संबंधित है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पहल को ज्ञान-संपदा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया। इस अवसर पर जनरल चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती अनुपमा चौहान भी उपस्थित रहीं। इस मौके पर जनरल अनिल चौहान ने कहा कि उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अनुपमा चौहान ने सैन्य सोसाइटी (एडब्ल्यूडब्ल्यूए) के माध्यम से नीति गांव को गोद लिया है, जहां वे सामाजिक एवं शैक्षिक विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इस दौरान प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट द्वारा संपादित पुस्तक ‘रंगभूमि दर्शन’ का विमोचन जनरल अनिल चौहान, डॉ. धन सिंह रावत, कुलपति श्रीप्रकाश सिंह ने किया।

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